दस सीटों में से तीन में मुस्लिम मतदाता निर्णायक रहते हैं। लेकिन इन सीटों पर कांग्रेस की चिंता ध्रुवीकरण से नुकसान की है।
नागौर जिले की दस सीटों में से तीन में मुस्लिम मतदाता निर्णायक रहते हैं। लेकिन इन सीटों पर कांग्रेस की चिंता ध्रुवीकरण से नुकसान की है। वहीं भाजपा के सामने सभी सीटों पर सबसे बड़ी चुनौती एंटी इंकबेंसी व एससी-एसटी एक्ट के बाद हुए जातीय आंदोलन से नुकसान की है। निर्दलीय हनुमान बेनीवाल का गृह जिला है, उनका सभी सीटों पर असर देखने को मिल सकता है।
नागौर की 10 में से 9 सीट पर भाजपा काबिज है। प्रदेश के दो मुस्लिम विधायक, नागौर से हबीबुर्रहमान व डीडवाना से केबिनेट मंत्री यूनुस खान नागौर जिले से हैं। बतौर मंत्री खान ने विकास भी खूब करवाया है पर तीन तलाक और मॉब लिंचिंग की घटनाओं का असर नागौर, डीडवाना व मकराना सीट पर हो सकता है। डेगाना विधायक अजय सिंह किलक सहकारिता मंत्री हैं, किसानों की कर्ज माफी उनके विभाग ने ही की है। जिले में बछड़ों के परिवहन पर रोक बड़ा मुद्दा बना है। चुनाव में दोनों मंत्रियों की साख भी दावं पर लगी हुई है। इसके अलावा हनुमान बेनीवाल फैक्टर राजनीतिक गुल खिला सकता है।
हर बार बदलते हैं चेहरे
अजमेर संभाग वह संभाग है, जहां किसी एक जाति या एक नेता का वर्चस्व नहीं है। सभी सीटों का अपना अलग गणित है और जातिगत समीकरण भी अलग हैं। शहरी सीटों को छोड़ दें तो ग्रामीण अंचल की सीटों पर लगातार एक ही पार्टी का या एक ही व्यक्ति लगातार विधायक नहीं बनता। जनता हर बार चेहरे बदल देती है। शहरी सीटों पर जो जीत रहेे हैं, उनकाा भी ऐसा नहीं है कि अन्य सीटों पर वर्चस्व हो।