जयपुर

Bhairana Dham Protest : सांसद हनुमान बेनीवाल का ‘आधी रात’ जयपुर कूच, बीच रास्ते प्रशासन के साथ बनी मांगों पर सहमति 

जयपुर के भैराणा धाम में संतों के आंदोलन के समर्थन में सांसद हनुमान बेनीवाल का आधी रात को जयपुर कूच। प्रशासन के साथ 800 बीघा रीको जमीन और डेयरी प्लॉट पर बनी सहमति।
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May 28, 2026
Hanuman Beniwal Jaipur Kooch Bhairana Dham Sant Andolan
Hanuman Beniwal Jaipur Kooch Bhairana Dham Sant Andolan

राजस्थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण अंचल में स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक और आस्था के बड़े केंद्र 'भैराणा धाम' की भूमि को बचाने के लिए चल रहा साधु-संतों का आंदोलन अब एक बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल के इस आंदोलन में सीधे उतरने और देर रात अपने हजारों समर्थकों के साथ जयपुर की तरफ मार्च शुरू करने के बाद प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है। आधी रात को हाईवे पर ही प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस महानिरीक्षक (IG), जिला कलक्टर और रीको (RIICO) के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई आपातकालीन वार्ता के बाद सरकार ने संतों और जनभावनाओं के आगे झुकते हुए विवादित भूमि पर औद्योगिक विकास के काम को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया है। इस समझौते के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे राजस्थान के जवानों, किसानों और सनातन संस्कृति की सामूहिक जीत करार दिया है।

वार्ता विफल होने के बाद किया था 'जयपुर कूच'

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत जयपुर जिले के भैराणा धाम में आयोजित एक विशाल सामाजिक महापंचायत से हुई थी। भैराणा धाम क्षेत्र में सरकार द्वारा औद्योगिक क्षेत्र (RIICO) विकसित करने और डेयरी परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित किए जाने के विरोध में स्थानीय ग्रामीण और साधु-संत लंबे समय से धरने पर बैठे थे। संतों का तर्क था कि यह भूमि सदियों से गौचर, धार्मिक गतिविधियों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का मुख्य आधार रही है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का औद्योगिक ढांचा खड़ा करना आस्था और पर्यावरण दोनों के साथ खिलवाड़ होगा।

इस गतिरोध को दूर करने के लिए पूर्व में भैराणा धाम परिसर के भीतर ही स्थानीय प्रशासन और आंदोलनकारी संतों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। प्रशासनिक अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण जब कल दोपहर की वार्ता पूरी तरह विफल हो गई, तो महापंचायत के मंच से सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार को सीधे चेतावनी देते हुए तुरंत राजधानी जयपुर की तरफ पैदल और वाहनों के माध्यम से कूच करने का शंखनाद कर दिया।

'आधी रात' को जयपुर हाईवे पर हलचल

सांसद हनुमान बेनीवाल के आह्वान पर देखते ही देखते भैराणा धाम की महापंचायत एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो गई। नागौर, जोधपुर, जयपुर ग्रामीण और आस-पास के क्षेत्रों से आए हजारों की संख्या में युवा, किसान और आरएलपी के कार्यकर्ता गाड़ियों के काफिले के साथ जयपुर की तरफ रवाना हो गए। आंदोलनकारियों का यह काफिला जैसे-जैसे आगे बढ़ा, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और राज्य सरकार के गृह विभाग में हड़कंप मच गया।

देर रात कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और संतों के प्रति आम जनता की गहरी सहानुभूति को देखते हुए जयपुर के संभागीय और जिला स्तरीय अधिकारियों ने बीच रास्ते में ही बेनीवाल के काफिले को रोककर बातचीत की मेज पर आने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद हाईवे के पास ही एक अस्थायी प्रशासनिक कैंप में वार्ता का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा।

इन प्रमुख मांगों पर बनी अंतिम सहमति

देर रात हुई इस मैराथन बैठक के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल ने स्वयं मीडिया के सामने आकर समझौते के मुख्य बिंदुओं को साझा किया। बेनीवाल ने बताया कि जनभावनाओं और संतों के सम्मान को ध्यान में रखते हुए सरकार और प्रशासन ने उनकी प्रमुख मांगों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

समझौते के तहत निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी है:

रीको (RIICO) कार्य पर तत्काल रोक: सरकार ने भैराणा धाम की लगभग 800 बीघा भूमि पर रीको (RIICO) द्वारा प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के सभी विकास कार्यों और निर्माण गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से रोकते हुए स्थगित कर दिया है।

डेयरी प्लॉट्स का आवंटन निरस्त: इस क्षेत्र में डेयरी विकास के नाम पर जो 2 बड़े व्यावसायिक प्लॉट आवंटित किए गए थे, उनके आवंटन और आगामी कार्य पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

उच्च स्तरीय साझा समिति का गठन: इस पूरे भूमि विवाद की तकनीकी और कानूनी जांच के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति में क्षेत्र के प्रमुख साधु-संत, निर्वाचित जनप्रनिधि, क्षेत्र के आईजी (IG), जिला कलेक्टर और रीको के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शामिल किए गए हैं।

7 दिनों में बैठक कर रिपोर्ट देगी कमेटी

सांसद हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि नवगठित साझा समिति आगामी 7 दिनों के भीतर अपनी पहली आधिकारिक बैठक आयोजित करेगी। यह समिति केवल कागजी कार्रवाई नहीं करेगी, बल्कि धरातल पर जाकर पूरे क्षेत्र का भौतिक सत्यापन करेगी। रिपोर्ट तैयार करते समय राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रसिद्ध 'अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान राज्य' के ऐतिहासिक न्यायिक फैसले की भावना का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

कमेटी इस बात की गहन जांच करेगी कि रीको के लिए आवंटित की गई 800 बीघा भूमि के भीतर कितने प्राकृतिक नदी-नाले, बहाव क्षेत्र और कैचमेंट एरिया आते हैं। उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्राकृतिक जल स्रोत या बहाव क्षेत्र को औद्योगिक या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इसी विधिक आधार का उपयोग करते हुए समिति अपनी तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके बाद रीको के इस भूमि आवंटन को स्थायी रूप से निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बेनीवाल बोले- 'यह जवानों की जीत है'

प्रशासन के साथ लिखित समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद हनुमान बेनीवाल ने अपने समर्थकों और संतों को संबोधित करते हुए कहा, "भैराणा धाम हमारी सांस्कृतिक आस्था, श्रद्धा और सामाजिक समरसता व एकता का एक अनूठा प्रतीक है। यहाँ आने वाला हर आम और खास व्यक्ति अपने मन में एक नई सकारात्मक ऊर्जा लेकर जाता है। हम किसी भी कीमत पर संतों के अपमान और हमारी पवित्र भूमि के व्यावसायिक दोहन को बर्दाश्त नहीं कर सकते।"

उन्होंने अत्यंत आत्मविश्वास के साथ आगे कहा, "प्रशासन ने हमारी करीब-करीब सभी मुख्य मांगें मान ली हैं और लिखित आश्वासन दिया है। हमें पूरा विश्वास है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगामी 15-20 दिन के भीतर हम इस पूरे 800 बीघा रीको इलाके के आवंटन को पूरी तरह से विधिक रूप से निरस्त करा देंगे। आधी रात को सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़ने वाले राजस्थान के इन बहादुर जवानों और अन्नदाता किसानों की यह बहुत बड़ी जीत है।"

Updated on:
28 May 2026 08:27 am
Published on:
28 May 2026 08:25 am