जयपुर

Rajasthan: ट्रेन में अस्थि कलश के लिए बुक होती है सीट, गंगा में विसर्जन के बाद लौटते वक्त रह जाती यादें

Ganga Asthi Visarjan: राजस्थान से हरिद्वार जाने वाली ट्रेनों में कई बार एक सीट पूरी यात्रा के दौरान खाली रहती है। उस पर न कोई यात्री बैठता है, न सामान रखा जाता है। वहां सिर्फ अस्थि कलश रखा होता है। अस्थि विसर्जन के लिए जा रहे कई परिवार दिवंगत परिजन के नाम से भी सीट आरक्षित कराते हैं, ताकि गंगा किनारे अंतिम विदाई तक उनका साथ बना रहे।
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Updated: 19 Jun 2026, 7:30 AM IST
Indian Funeral Traditions
गंगा में विसर्जन के लिए जाते वक्त ट्रेन में सीट पर रखा अ​स्थि कलश, पत्रिका फोटो

Ganga Asthi Visarjan: राजस्थान से हरिद्वार जाने वाली ट्रेनों में कई बार एक सीट पूरी यात्रा के दौरान खाली रहती है। उस पर न कोई यात्री बैठता है, न सामान रखा जाता है। वहां सिर्फ अस्थि कलश रखा होता है। अस्थि विसर्जन के लिए जा रहे कई परिवार दिवंगत परिजन के नाम से भी सीट आरक्षित कराते हैं, ताकि गंगा किनारे अंतिम विदाई तक उनका साथ बना रहे। लौटते समय पूरा परिवार वापस आता है, लेकिन वह एक मुसाफिर हमेशा के लिए हरिद्वार में ही रह जाता है।

जैसे परिवार का सदस्य साथ बैठा हो

राजस्थान से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार जाते हैं। कई परिवार अस्थि कलश को सामान की तरह रखने के बजाय उसके लिए अलग सीट आरक्षित कराते हैं। पूरी यात्रा के दौरान कलश उसी सम्मान के साथ बर्थ पर रखा जाता है, जैसे परिवार का कोई सदस्य साथ बैठा हो। कई लोग दिवंगत की तस्वीर भी साथ रखते हैं। उनके लिए यह सफर केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने प्रियजन के साथ आखिरी बार बिताए जा रहे कुछ अनमोल पलों जैसा होता है।

सहयात्री भी बन जाते हैं भावनाओं के सहभागी

जब सहयात्रियों को पता चलता है कि खाली सीट पर अस्थि कलश है, तो वे भी उस भावना का सम्मान करते हैं। कोई उस सीट पर बैठने की कोशिश नहीं करता। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ऐसी कई सीटें प्रतिदिन आरक्षित कराई जाती हैं। ट्रेन में आरक्षित सीट की उपलब्धता नहीं होने पर यात्री बसों से हरिद्वार पहुंचते हैं और ठीक ट्रेन की तर्ज पर ही बस में भी एक अतिरिक्त सीट बुक करवाकर लोग सफर करते हैं।

शास्त्रों में अनिवार्य नहीं, श्रद्धा का प्रतीक

कर्मकांडी पंडितों के अनुसार शास्त्रों में अस्थि कलश के लिए अलग सीट आरक्षित कराने का कोई विधान नहीं है। लेकिन श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता की भावना से ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से उचित माना जाता है।

राजस्थान से रोजाना 5 हजार लोग जा रहे हरिद्वार

राजस्थान से हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए योगा एक्सप्रेस, बाड़मेर-ऋषिकेश, ओखा-देहरादून, बीकानेर-हरिद्वार, उदयपुर-योगनगरी और भावनगर टर्मिनस-हरिद्वार सहित कई ट्रेनें संचालित होती हैं। इनसे प्रतिदिन करीब पांच हजार यात्री हरिद्वार पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या अस्थि विसर्जन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जाने वालों की होती है।

अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे

Updated on:
19 Jun 2026, 7:30 AM IST
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