जयपुर

व्यवहार और निश्चय के समन्वय से ही संभव है मोक्ष : आचार्य दिव्येशचन्द्र सागरसूरि

Aug 04, 2026
Rajasthan

धर्मसभा में आचार और विचार दोनों को आत्मकल्याण का आधार बताया

हुब्बल्ली। जैन मरुधर संघ, हुब्बल्ली में आयोजित धर्मसभा में आचार्य दिव्येशचन्द्र सागरसूरि ने कहा कि व्यवहार और निश्चय दोनों मार्गों के समन्वय से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। तीर्थंकर परमात्मा केवलज्ञान प्राप्ति के बाद धर्मशासन की स्थापना कर समस्त जीवों को मोक्ष का मार्ग बताते हैं और उसी मार्ग का अनुसरण कर असंख्य आत्माओं ने मोक्ष पद प्राप्त किया है।

आचार्य ने कहा कि व्यवहार मार्ग आचार प्रधान तथा निश्चय मार्ग विचार और भाव प्रधान है। दान, शील और तप व्यवहार मार्ग के आधार हैं, जबकि निर्मल भावों की साधना निश्चय मार्ग का स्वरूप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवहार मार्ग का पालन किए बिना निश्चय मार्ग की सिद्धि संभव नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार बैलगाड़ी दोनों पहियों के सहारे चलती है, उसी प्रकार आचार और विचार, व्यवहार और निश्चय— दोनों की संयुक्त साधना से ही आत्मकल्याण और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साधक को लक्ष्य स्पष्ट रखते हुए दोनों मार्गों का संतुलित पालन करना चाहिए।

Updated on:
04 Aug 2026 06:01 am
Published on:
04 Aug 2026 06:01 am