Rajasthan Pollution: राजस्थान के शहरों के हालात भी अच्छे नहीं हैं। प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्य सरकार के पास इससे निपटने का कोई ठोस प्लान नहीं है।
Air Pollution: जयपुर। सर्दी की शुरुआत से ही प्रदूषण का असर सेहत पर दिखने लगा है। राजस्थान के शहरों के हालात भी अच्छे नहीं हैं। प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्य सरकार के पास इससे निपटने का कोई ठोस प्लान नहीं है। प्रदेश में जयपुर, कोटा, जोधपुर, पाली और अलवर सहित कई शहरों में प्रदूषण का असर सेहत के लिए जोखिमभरा हो गया है। कोटा शहर में तो आबादी के बीच ईंट-भट्टे चल रहे हैं। अन्य शहरों में भी ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं है। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा का कहना है कि प्रदूषण कम करने के लिए अभी कोई विशेष प्लान तैयार नहीं किया गया है।
केन्द्र सरकार ने जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत वायु प्रदूषण निवारण के लिए दीर्घकालीन योजना पर कार्य करना था। इसमें दस लाख से अधिक आबादी वाले 131 शहरों को शामिल किया गया। इसमें जयपुर, जोधपुर और कोटा भी शामिल हैं। करीब पांच साल गुजर जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं हुए। इन शहरों के स्थानीय निकाय स्तर पर ही केवल एंटी स्मोक गन खरीद कर इतिश्री कर ली गई है।
राज्य के पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा का कहना है कि अलवर और भिवाड़ी क्षेत्र में जयपुर से भी ज्यादा प्रदूषण है। प्रदूषित इलाकों में एंटी स्मोक गन व मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। प्रदूषण कम करने के लिए अभी कोई विशेष प्लान तैयार नहीं किया गया है। उपलब्ध संसाधनों से ही समाधान में जुटे हैं।
वायु प्रदूषण का असर सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी-आइपीडी व इमरजेंसी में भी दिखाई दे रहा है। स्थिति ये है कि टीबी, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को गंभीर हालत में इलाज के लिए लाया जा रहा है। चिकित्सकों का मत है कि, वर्तमान में अस्पतालों की ओपीडी में 40 से 60 फीसदी मरीज प्रदूषण से बीमार होकर पहुंच रहे हैं।
जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि वाहनों का धुंआ, तापमान में गिरावट, ठोस अपशिष्ट का पूरा निस्तारण नहीं होने, सड़क धूल, निर्माण कार्य की वजह से स्थिति काफी खराब हो रही है। उद्योगों में भी पर्यावरण नियमों की पालना नहीं हो रही है। बड़े शहर जयपुर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर में भी दीपावली के बाद से प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। वातावरण में नमी की मात्रा से धुआं छाया हुआ है।
शहर और गांवों में तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या भी वायु प्रदूषण बढ़ने का बड़ा कारण हैं। राजस्थान में अब तक करीब 2.16 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं।
15 लाख वाहनों का सालाना प्रदेश में हो रहा पंजीयन
03 लाख वाहनों का हर साल जयपुर में पंजीयन
70 हजार वाहन हर रोज जयपुर में प्रवेश करते हैं
2.5 लाख वाहन दूसरे शहर और राज्यों के जयपुर में पहले से ही मौजूद