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आपकी बात: गर्मी में पेयजल संकट को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 16, 2026

जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

गर्मी के दिनों में जल संकट गंभीर रूप ले लेता है, इसलिए इससे निपटने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुओं और बावड़ियों का जीर्णोद्धार कर उन्हें फिर से उपयोगी बनाया जाना चाहिए। वर्षा जल का संचयन कर उसका शुद्धिकरण कर उपयोग बढ़ाया जा सकता है। अवैध नल कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए और पाइप लाइनों की लीकेज की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। साथ ही 'पानी बचाओ' के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रैलियों और नुक्कड़ नाटकों जैसे जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। - निर्मला वशिष्ठ, राजगढ़ (अलवर)

वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों का संरक्षण

गर्मी के मौसम में पेयजल संकट अक्सर गंभीर समस्या बन जाता है। इससे निपटने के लिए वर्षा जल संचयन को हर घर और इमारत में अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, ताकि बरसात का पानी सुरक्षित रखा जा सके। पुराने तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन भी आवश्यक है। भूजल के अत्यधिक दोहन पर नियंत्रण के साथ-साथ शहरों और गांवों में पाइपलाइन लीकेज को रोकना भी जरूरी है। इसके अलावा अधिक से अधिक पेड़ लगाना और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। - डॉ. दीपिका झंवर, जयपुर

पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन जरूरी

राजस्थान में भीषण गर्मी के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इसका समाधान तात्कालिक प्रबंधन के साथ दीर्घकालिक योजना में छिपा है। पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों, कुओं और तालाबों का पुनरुद्धार कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ानी होगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है, ताकि भूजल स्तर में गिरावट रोकी जा सके। प्रशासन को पाइपलाइन लीकेज और पानी की चोरी पर सख्ती करनी चाहिए तथा चेक डैम और एनिकटों का निर्माण बढ़ाना चाहिए। आमजन भी जल मितव्ययिता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। - संगीता जाजड़ा, नागौर

जल संरक्षण के लिए जनजागरूकता जरूरी

जल जीवन का आधार है, इसलिए इसे व्यर्थ बहने से रोकना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना जरूरी है। टपकते नलों, पाइपलाइन रिसाव और अवैध कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। घरों में भी पानी बचाने के छोटे-छोटे उपाय अपनाए जा सकते हैं, जैसे वाहनों को गीले कपड़े से साफ करना और सब्जियां धोने के पानी को पौधों में उपयोग करना। यदि अभी से जल संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। - लहर सनाढ्य, उदयपुर

जल संरक्षण में तकनीक की भूमिका

गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन बेहद आवश्यक है। सरकार और स्थानीय निकायों को जल वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ लोगों में पानी बचाने की जागरूकता भी बढ़ानी चाहिए। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना और जल शुद्धिकरण की आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना भी प्रभावी उपाय साबित हो सकते हैं। यदि जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए और आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाए, तो पेयजल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। - दीपु पाटीदार, झालावाड़

घरेलू स्तर पर भी संभव है जल बचत

गर्मी के मौसम में पानी की कमी आम समस्या बन जाती है, इसलिए समय रहते जल प्रबंधन जरूरी है। जहां भी बावड़ियां, कुएं और नदियां हैं, उनकी सफाई कर पानी का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। सार्वजनिक नलों और पाइपलाइनों की मरम्मत कर अनावश्यक जल बहाव रोका जा सकता है। घरों में भी कई छोटे उपाय अपनाकर पानी बचाया जा सकता है, जैसे कपड़े इकट्ठे कर धोना, बर्तन धोने में बाल्टी का उपयोग करना और साफ-सफाई के पानी को पौधों में डालना। बच्चों को भी पानी का महत्व समझाकर बचत की आदत डालना जरूरी है। - लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़

प्राचीन जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण

पेयजल संकट से निपटने के लिए सबसे पहले आसपास के प्राचीन जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। कुएं, बावड़ियां और तालाब यदि साफ और सुरक्षित रहें, तो बरसात का पानी उनमें जमा किया जा सकता है और जरूरत के समय उपयोग में लाया जा सकता है। इसके साथ ही लोगों को यह समझाना जरूरी है कि पानी अनमोल संसाधन है और इसका मुख्य स्रोत वर्षा ही है। इसलिए पानी का उपयोग सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। - चंद्रशेखर प्रजापत, जोधपुर