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वित्तीय उत्पादों व सेवाओं की ‘मिस-सेलिंग’ चिंताजनक

इरडा की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार केवल जीवन बीमा कंपनियों के विरुद्ध वर्ष 2024-25 में अनुचित व्यवसाय पद्धतियों (अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिसेज) की शिकायतों की संख्या 26,667 (कुल शिकायतों का 22%) थी। सच्चाई तो यह है कि सभी मामलों में शिकायत नहीं हो पाती है तथा इनकी संख्या इससे काफी अधिक है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 16, 2026

आर.के. विजय - पूर्व अधिकारी, बीमा कंपनी,

नब्बे वर्षीय एक बुजुर्ग को 99 वर्ष की अवधि की जीवन बीमा पॉलिसी बेचने के समाचारों ने गत माह मीडिया में सुर्खियां बटोरी। दो लाख रुपए सालाना प्रीमियम वाली इस पॉलिसी की मेच्योरिटी वर्ष 2124 में थी। तकनीकी कारणों से उनकी पुत्री को 'लाइफ एश्योर्ड' रखा गया जबकि प्रीमियम उनके खाते से ही लिया गया। बैंक पर बरसों के भरोसे के चलते उन्होंने बिना समझे यह खरीद की, जबकि उनके लिए यह उत्पाद पूर्णतया अनुपयुक्त था। चिंताजनक बात यह है कि इस कारनामे को किसी बीमा एजेंट ने नहीं, बल्कि सरकारी बैंक के प्रबंधक ने अंजाम दिया। सीमित संसाधनों वाले बुजुर्ग के जीवन के दसवें दशक में घटित यह मामला वित्तीय उत्पादों की अनुचित बिक्री (मिस-सेलिंग) का अति क्रूर नमूना है। बीमा तथा बैंकिंग ही नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड तथा निवेश के अन्य क्षेत्रों में भी मिस-सेलिंग व्याप्त है। सवाल यह है कि आखिर मिस-सेलिंग क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार मिस-सेलिंग ऐसे उत्पाद या सेवा की बिक्री है, जो ग्राहक की प्रोफाइल को देखते हुए न तो उसके लिए उपयुक्त है और न ही उचित। पूर्ण जानकारी दिए बिना अथवा गलत जानकारी देकर या ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना की गई बिक्री तथा बिक्री के साथ अन्य उत्पादों की बंडलिंग (आवश्यक खरीद) भी मिस-सेलिंग है। भारतीय बीमा विनियामक व विकास प्राधिकरण (इरडा) उपभोक्ताओं को बीमा उत्पादों की शर्तों, नियमों तथा उपयुक्तता के बारे में उचित जानकारी दिए बिना बेचने तथा इनके संदर्भ में झूठा या भ्रामक बयान देने या तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने अथवा अपवादों को छिपाने को भी मिस-सेलिंग मानता है। भारत में मिस-सेलिंग की बढ़ती शिकायतों से सभी वित्तीय नियामक चिंतित हैं। इरडा की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार केवल जीवन बीमा कंपनियों के विरुद्ध वर्ष 2024-25 में अनुचित व्यवसाय पद्धतियों (अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिसेज) की शिकायतों की संख्या 26,667 (कुल शिकायतों का 22%) थी। सच्चाई तो यह है कि सभी मामलों में शिकायत नहीं हो पाती है तथा इनकी संख्या इससे काफी अधिक है। ऐसी शिकायतों के मूल में मिस-सेलिंग का होना स्वाभाविक है।

मिस-सेलिंग को रोकने या कम करने के लिए सभी नियामक विभिन्न उपाय करते हैं। आरबीआइ ने गत 11 फरवरी को जारी बैंकों व अन्य विनियमित संस्थाओं के 'जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण' पर ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में वित्तीय उत्पादों तथा सेवाओं की मिस-सेलिंग पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कई प्रावधान किए हैं। इनके अनुसार जिन मामलों में मिस-सेलिंग सिद्ध हो जाती है, उनमें बैंक ग्राहक को पूरी खरीद राशि लौटाएगा। नुकसान के लिए ग्राहक को नियमानुसार मुआवजा भी देगा। नियामकों को और निगरानी बढ़ानी होगी तथा कुछ कठोर दंडात्मक प्रावधान करने होंगे। उपभोक्ताओं को अधिक सतर्क रहना होगा। उन्हें खरीदे जाने वाले उत्पाद के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी होगी। असामान्य लगने वाले प्रत्येक वादे को अधिक गहराई से परखना होगा।