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स्मृति में… कुलिश जी की जनपक्ष, और साहस से जुड़ी लेखनी पत्रकारिता के लिए मिसाल

Legacy of Karpoor Chandra Kulish: मेरे लिए कर्पूर चंद्र कुलिश जी ऐसे पत्रकार रहे, युवाओं की आकांक्षाएं, महिलाओं जिन्होंने खबरों को जनपक्ष, पर अत्याचार, सामाजिक निर्भीकता, नैतिकता और व्यंग्य की कुरीतियां, भ्रष्टाचार और संतुलित दृष्टि दी।

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पेंटिंग रासीसर (बीकानेर) से पत्रिका पाठक अनुष्का सीगड़ से साभार प्राप्त

पेंटिंग रासीसर (बीकानेर) से पत्रिका पाठक अनुष्का सीगड़ से साभार प्राप्त

Legacy of Karpoor Chandra Kulish:मेरे लिए कर्पूर चंद्र कुलिश जी ऐसे पत्रकार रहे, जिन्होंने खबरों को जनपक्ष, निर्भीकता, नैतिकता और व्यंग्य की संतुलित दृष्टि दी। उनकी नजर में समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी था। वे सत्ता के आगे सिर झुकाने के बजाय प्रश्न खड़े करने वाली पत्रकारिता के पक्षधर थे। सीमित साधनों में शुरू हुई राजस्थान पत्रिका को उन्होंने जनविश्वास की ऐसी धारा बनाया, जो घर-घर तक सच कहने वाली आवाज बनी। मुझे कुलिश जी की पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह लगता है कि उन्होंने अखबार के हर पेज को जनसरोकार से जोड़ा।

गांवों की समस्याएं, किसानों की व्यथा, युवाओं की आकांक्षाएं, महिलाओं अत्याचार, सामाजिक भ्रष्टाचार और पर कुरीतियां, लालफीताशाही जैसे मुद्दों को उन्होंने मुख्यधारा की खबर बनाया। उन्होंने पाठक के विश्वास को सबसे बड़ा निवेश माना और पत्रकारिता को बाजारवाद व सत्ता निकटता से बचाने की कोशिश की। उनकी लेखनी में व्यंग्य था, पर कटुता नहीं। तर्क था, पर शोर नहीं। आलोचना थी, तो समाधान की दिशा भी थी। जनहित को स्वहित से ऊपर रखने की यही उनकी सीख थी। आज भी उनकी यही दृष्टि हमें सबसे अधिक प्रासंगिक लगती है।

उनकी लेखनी में पत्रिका को उन्होंने जनविश्वास की व्यंग्य था, पर कटुता नहीं। तर्क था, ऐसी धारा बनाया, जो घर-घर तक पर शोर नहीं। आलोचना थी, तो सच कहने वाली आवाज बनी। समाधान की दिशा भी थी।

जनहित मुझे कुलिश जी की पत्रकारिता का को स्वहित से ऊपर रखने की यही सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह लगता है उनकी सीख थी। आज भी उनकी कि उन्होंने अखबार के हर पेज को यही दृष्टि हमें सबसे अधिक जनसरोकार से जोड़ा। गांवों की प्रासंगिक लगती है।

प्रेषकः डॉ. नयन प्रकाश गांधी, कोटा