नागौर

केन्द्र सरकार के आदेश के बाद भी छुपा रहे मुआवजे का प्रावधान

अपना घाटा उपभोक्ताओं के माथे मढऩे और उनसे पाई-पाई वसूलने वाली बिजली कंपनियां देने की बारी आती है तो मुंह छिपाने लगती है। ताजा मामला बस्सी से सीकर ग्रिड के बीच हाइटेंशन लाईन डालने का है। बस्सी से सीकर ग्रिड के बीच हाईटेंशन लाइन डालने के मामले में किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
less than 1 minute read
• •
Updated: 10 Dec 2016, 7:59 PM IST
Hiding compensation Provision
Hiding compensation Provision

जयपुर. अपना घाटा उपभोक्ताओं के माथे मढऩे और उनसे पाई-पाई वसूलने वाली बिजली कंपनियां देने की बारी आती है तो मुंह छिपाने लगती है। ताजा मामला बस्सी से सीकर ग्रिड के बीच हाइटेंशन लाईन डालने का है। बस्सी से सीकर ग्रिड के बीच हाईटेंशन लाइन डालने के मामले में किसानों को गुमराह किया जा रहा है। भानपुर कलां, लबाना, अचरोल के किसानों को मुआवजे का प्रावधान नहीं होने का तर्क दिया गया है जबकि केंद्र सरकार इसे लेकर 15 अक्टूबर 2015 को नया सर्कुलर जारी कर चुकी है।

मुआवजा देने की बजाय उन्हें धमकाया जा रहा

विद्युत मंत्रालय के उक्त सर्कुलर के अनुसार हाईटेंशन लाइन का पोल जिसकी जमीन पर खड़ा होगा, उसे डीएलसी रेट के मुताबिक 85 प्रतिशत मुआवजा भुगतान करना होगा। तार खींचने के दौरान उनके नीचे 46 फीट चौड़ाई तक भूमि का डीएलसी रेट का 15 प्रतिशत मुआवजा देना होगा। मंत्रालय के अवर सचिव (पावर) संजीव जैन का कहना है कि सर्कुलर जिस दिन जारी हुआ, उसी दिन लागू भी किया जा चुका है। इधर, ऊर्जा विभाग के अधिकारी यह सर्कुलर दबाकर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि मुआवजा देने की बजाय उन्हें धमकाया जा रहा है।

Published on: