4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दीपावली के रंग में रंगने लगे नागौर के बाजार, खरीदारी के लिए उमडऩे लगी भीड़

नागौर. दीपावली नजदीक आते ही शहर के बाजार रोशनी और सजावट के रंग में रंगने लगे हैं। घरों में पूजा और सजावट की तैयारियों के लिए खरीदारी शुरू हो गई है। बाजारों में मिट्टी के दीये, दीपक, बर्तन, सजावटी झालरें, बंदनवार और रंग-बिरंगे सजावटी सामान की दुकानें सज गई हैं। सुबह से शाम तक ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई है। महिलाएं घरों की सजावट और पूजा के लिए पसंदीदा सामान खरीद रही हैं। दुकानदारों को भी दीपावली पर अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नागौर

•

image

Sharad Shukla

•

Updated: 4 Nov 2026, 9:32 PM IST

Nagaur: Decorative garlands for Diwali

नागौर. दीपावली के लिए सजावटी मालाएं और बंदनवार खरीदने पहुंच रहे ग्राहक।

मिट्टी के दीये, बर्तन और सजावटी सामान की दुकानों पर बढ़ी रौनक
किले की ढाल से दिल्ली दरवाजा तक सजी दुकानें, घरों को सजाने के लिए पसंद कर रहे लोग
बाजारों में दिनभर ग्राहकों की आवाजाही, दुकानदारों को अच्छे कारोबार की उम्मीद

नागौर. दीपावली नजदीक आते ही शहर के बाजार रोशनी और सजावट के रंग में रंगने लगे हैं। घरों को सजाने से लेकर पूजा की तैयारियों तक के लिए खरीदारी शुरू हो गई है। बाजारों में मिट्टी के दीये, दीपक, मिट्टी के बर्तन, सजावटी झालरें, बंदनवार और रंग-बिरंगे सजावटी सामान की दुकानें सज गई हैं। सुबह से शाम तक बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई है। खासकर महिलाएं घर की सजावट और पूजा में काम आने वाला सामान पसंद करती नजर आ रही हैं। दुकानदार भी दीपावली की खरीदारी बढऩे से उत्साहित हैं।

मिट्टी के दीये और बर्तनों की बढ़ी रौनक
दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों की खरीदारी का अलग ही महत्व है। बाजार में छोटे-बड़े दीयों के साथ मिट्टी की कुल्हडिय़ां, दीपक, पूजा के बर्तन और अन्य पारंपरिक सामान दुकानों पर सजे हुए नजर आने लगे हैं। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदारों के यहां ग्राहकों की आवाजाही बढऩे लगी है। दीपोत्सव को ध्यान में रखते हुए अब लोगों की भीड़ भी अपनी जरूरत के अनुसार दीये और पूजा में उपयोग होने वाले मिट्टी के सामान खरीदने के लिए बाजारों में रहे हैं। दुकानों पर सजे हुए पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ अलग-अलग आकार और डिजाइन के दीपक भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

बंदनवार और झालरों से सज रहीं दुकानें
गांधी चौक एवं इसके आसपास सडक़ के दोनो ओर अब दीपावली पर घरों के मुख्य द्वार को सजाने के लिए बंदनवार, रंगीन फूलों की मालाएं, सजावटी झालरें और पूजा से जुड़ा सामान सजे हुए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हुए है। इन दुकानों पर रंग-बिरंगे सजावटी सामान की कतारें लगी हैं। लोग घरों के दरवाजों और पूजा स्थलों की सजावट के लिए अपनी पसंद का सामान खरीद रहे हैं। बाजार में पारंपरिक सजावट के साथ नए डिजाइन के सजावटी सामान भी दुकानों पर आकर्षक अंदाज में लगाए हुए हैं। इसी तरह शहर के किले की ढाल, सदर बाजार, गांधी चौक, तिगरी बाजार, बर्तन बाजार, सर्राफा बाजार, मच्छियों का चौक, दिल्ली दरवाजा बाजार, मानासर चौराहा और विजयबल्लभ चौराहे सहित आसपास के क्षेत्रों में दीपावली की रौनक दिखाई देने लगी है। रंग-बिरंगे सजावटी दीयों की अलग रौनक
इस बार मिट्टी के दीयों को भी आकर्षक रूप दिया गया है। अलग-अलग आकार और डिजाइन में तैयार किए गए सजावटी दीये रंगों से सजाए गए हैं। इनकी कीमत 20 से 50 रुपए तक है। लोग इन्हें घरों के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और आंगन को सजाने के लिए खरीद रहे हैं। साधारण मिट्टी के दीयों के साथ रंगीन और सजावटी दीपक भी दुकानों पर सजे हैं। इनकी अलग-अलग बनावट और रंग इन्हें खास बना रहे हैं। पारंपरिक दीयों के साथ सजावटी कुल्हडिय़ां और मिट्टी के अन्य छोटे-बड़े बर्तन के साथ ही दीपावली पर घर के मुख्य द्वार को सजाने के लिए मिट्टी से बने बंदनवार भी बाजार में उपलब्ध हैं। इनके साथ मिट्टी के पारंपरिक बर्तन और पूजा में काम आने वाली वस्तुएं भी सजाई गई हैं। बाजार में मिट्टी से बनी वस्तुओं की आकर्षक बनावट भी लोगों को अपनी ओर खींच रही है।
परंपरा से जुड़ा है मिट्टी के दीयों का महत्व
दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। चैनार के कमल प्रजापत ने बताया कि बिजली की सजावट और आधुनिक रोशनी के बीच भी मिट्टी के दीयों का महत्व बना हुआ है। घरों में पूजा के समय दीये जलाने के साथ मुख्य द्वार और आंगन में दीप सजाने की परंपरा के चलते ही दीपोत्सव के दौरान इनकी खरीदारी से पारंपरिक मिट्टी के सामान के बाजार को भी रौनक मिलती है। यही वजह है कि हर साल दीपावली से पहले मिट्टी के दीयों और पारंपरिक बर्तनों का बाजार सजता है।