जयपुर

Jaipur: खुद को CM का रिश्तेदार बताने वाले आरोपी को हाईकोर्ट से झटका, FIR रद्द करने से इनकार

CM Relative Claim Allegation: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के मानसरोवर में अधीनस्थ अदालत के स्टे के बावजूद जमीन पर कब्जा करने के मामले में प्रमोद शर्मा सहित अन्य के खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद्द करने से इनकार कर दिया।

2 min read
May 02, 2026
आरोपी प्रमोद शर्मा, पत्रिका फाइल फोटो

CM Relative Claim Allegation: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के मानसरोवर में अधीनस्थ अदालत के स्टे के बावजूद जमीन पर कब्जा करने के मामले में प्रमोद शर्मा सहित अन्य के खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार व शिकायतकर्ता की ओर से शर्मा के खिलाफ एफआइआर रद्द करने का विरोध किया।
न्यायाधीश उमाशंकर व्यास ने प्रमोद शर्मा की आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए शुक्रवार को यह आदेश दिया। परिवादी ने आरोपी पर खुद को सीएम का रिश्तेदार बताकर रौब जमाने का आरोप लगाया है।

ये भी पढ़ें

जयपुर सीरियल ब्लास्ट : जिंदा बम मामले में दो आतंकियों को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

याचिकाकर्ता की ओर से ये कहा…

अधिवक्ता एस एस होरा ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ 13 जुलाई, 2025 को मानसरोवर पुलिस थाने में भूमि पर कब्जा करने की एफआइआर दर्ज कराई गई, जिसमें कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। वह भूमि से जुड़ी दोनों गृह निर्माण सहकारी समितियों के कार्यों से जुड़ा हुआ भी नहीं है।

एफआइआर में बताया है कि जमीन को लेकर करीब दो दशक से पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति व नवजीवन गृह निर्माण सहकारी समिति के बीच सिविल विवाद चल रहा है। ऐसे में सिविल मामले को आपराधिक प्रकरण में बदलने के लिए यह एफआइआर दर्ज कराई गई है। एफआइआर के अनुसार सितबर-अक्टूबर 2024 में कब्जा करने की बात कही है तो फिर 17 जुलाई, 2025 तक एफआइआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। एक बार एफआर भी प्रस्तावित हो चुकी। ऐसे में उसके खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद्द किया जाए।

परिवादी की ओर से कहा…

पूर्व विधायक शिवराम शर्मा के पुत्र परिवादी घनश्याम शर्मा ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र, अधिवक्ता गिर्राज प्रसाद शर्मा व जया मित्र ने कहा कि आरोपी प्रमोद शर्मा अपने आप को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर प्रभाव जमाता है। जब पुलिस ने जांच के दौरान 15 अप्रेल और 17 अप्रेल को नोटिस दिया तो यह याचिका दायर कर दी, जबकि अभी मामले में अनुसंधान शुरू ही हुआ है।

राज्य सरकार ने कहा…

महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद व राजकीय अधिवक्ता राजेश चाैधरी ने एफआइआर रद्द करने का विरोध करते हुए कहा कि एफआइआर के अनुसार आरोप प्रमाणित हैं और पुलिस को अनुसंधान करने का अधिकार है। सभी पक्ष सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

ये भी पढ़ें

Good News: जयपुर-उदयपुर वंदेभारत फिर दौड़ेगी, जोधपुर को भी एक और इंटरसिटी ट्रेन की सौगात
Also Read
View All