
जयपुर। भाजपा के मंत्री जहां भी जा रहे हैं, उनको ज्यादातर जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में बीकानेर गए सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक का जोरदार विरोध हुआ था। उनको पार्षदों ने घेर लिया। इस मामले की गूंज जयपुर तक पहुंची थी।
इससे पहलेे भाजपा ने अप्रेल में मंत्रियों-विधायकों को अपने गृहक्षेत्र में जाकर कामकाज गिनाने को क्या कहा, यह उनके लिए ही उलटा पड़ गया था। ज्यादातर को अपने ही कार्यकर्ताओं ने एेसा आईना दिखाया है कि उनके लिए घूमना ही भारी पड़ रहा है। कई विधायकों को कार्यकर्ताओं ने यह तक कह दिया कि चार साल बाद अब क्या करने आए हो? इस नाराजगी से दो चार नए ही नहीं वरिष्ठ विधायक भी हो रहे हैं। वरिष्ठ विधायकों के प्रति भी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है। इन बैठकों में सत्ता ही नहीं संगठन के प्रति भी गहरी नाराजगी सामने आ रही है।
संसदीय सचिव और विधायक कैलाश वर्र्मा जब अपने क्षेत्र में गए तो उनको कड़े शब्दों में कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब क्यों आए तो, इतने सालों से कहां थे। लोगों ने सड़क और पानी की समस्या को लेकर सवाल उठाए और कहा सवा चार साल में एक बार भी नहीं आए। गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने तो विरोध को देख दौरे ही बंद कर दिए और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक ही करने लगे। कटारिया जब कोटा बैठक लेने गए तो वहां भी कार्यकर्ताओं ने कह दिया कि चार साल में पुराने कार्यकर्ताओं के कितने छाले पड़ गए, कोई देखने तक नहीं आया और अब जब चुनाव आ गया तो बातचीत करने आ गए। बाड़मेर में जब सांसद रामचरण बोहरा ने जिले की बैठक ली तो कार्यकर्ताआों ने सारे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश जताते हुए यहां तक कह दिया कि सुधर जाओ वरना चुनाव में इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा। कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी जब सिरोही की बैठक लेने गए तो कार्यकर्ताओं ने यहां तक कह दिया कि पूरे जिले में ही परिवर्तन जरूरी है, अन्यथा भाजपा की स्थिति सही नहीं रहने वाली है। जैतारण में मंत्री सुरेन्द्र गोयल को लेकर नाराजगी जताई। नवलगढ में हुई बैठक में सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान के सामने जिलाध्यक्ष को लेकर जमकर नाराजगी जताई गई। जयपुर में जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी विद्याधर नगर विधानसभा की बैठक लेने गए तो वहां कार्यकर्ताओं ने जमकर नाराजगी दिखाई। कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि सत्ता और संगठन में आम व्यक्ति की सुनवाई होना ही बंद हो गई है। यहां तक कह दिया कि संगठन तो विधायकों की कठपुतली बन कर रह गया है।