
जयपुर। डांस यानि नृत्च भावनाओं ओ अभिव्यक्त करने का सबसे लोकप्रिय और उत्तम रूप है। यह न केवल भावनाओं को बड़े स्तर पर व्यक्त करता है, बल्कि इंसान की संज्ञानात्मक स्मृति को भी बढ़ाता है। सब इस पर निर्भर है कि आप किसी भी विषय को दर्शकों से कैसे जोड़ते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने डांस मूव्स और एक्सप्रेशन में कितने जान फूंकते हैं। यानि डांस मूव्स में इतनी क्षमता होती है कि उसके बल पर आप दर्शकों के दिल में उतर सकते हैं।
विभिन्न प्रकार के डांस के रूप हैं और यह संगीत और बॉलीवुड में सदियों से किस तरह से धूम मचाता आया है। जहां तक डांस मूव्स की बात है, इन दिनों समकालीन डांस में ‘ज़ुम्बा’ और लातिनी डांस ‘टैंगो’ व अन्य प्रचलन में है। इनमें से कुछ डांस बॉलीवुड के लिए आज भी दुर्लभ हैं। डांस वीडियो में संबंधित कई वीडियो जीवंत होते हैं, क्योंकि यह पूरे परिदृश्य को जीवंत बनाने में सक्षम होते हैं। इसके लिए पूरी कहानी कोरियोग्राफर द्वारा तैयार किया जाता है और उसी के अनुरूप संगीत वीडियो में जान डालने का काम करते हैं। एक बार स्टोरी का जुनून व थीम तैयार होने के बाद संगीत को वीडियो में दर्शाने का काम किया जाता है। हाई वोल्टेज डांस वीडियो के लिए पेप्पी म्यूजिक और हिप हॉप शैली की आवश्यकता होती है। इसमें वह संगीत भी शामिल होता है, जो वीडियो में सहजता और जान डालकर उसे यादगार लम्हे में तब्दील कर देता है।
ऐसे कोरियोग्राफरों में से एक हैं सौरभ प्रजापति (Choreographer Saurabh Prajapati)। वह बहुत ही युवा और प्रतिभाशाली निर्देशक और छायाकार हैं। उन्होंने "फिदाई" के संगीत वीडियो में खुद के टैलेंट के दम पर डांस मूव्स में जान डालने का काम किया है। उनका यह काम लोगों के दिल में उतने वाला है। खास बात यह है कि उन्होंने फिदाई को उस स्तर का बनाया है, जिसकी चर्चा सुर्खियों में है। यही वजह है कि फिदाई को लेकर आमिर खान का मत काबिलेतारीफ है। वह कहते हैं - "कितना शानदार और वीडियो और म्यूजिक है”? दरअसल, सौरभ प्रजापति की सोच कोरियोग्राफी के लिहाज से विचारोत्तेजक है। मुझे तो ऐसा लगता है कि आने वाले समय में उनके कई और वीडियो दर्शकों से अधिक से अधिक पहचान और प्रशंसा प्राप्त करेंगे।