
जयपुर
जहां एक तरफ सरकार विकास का राग आलाप रही है वहीं दूसरी तरफ सवाईमाधोपुर में क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर नई पुलिया बनाने तक का बजट नहीं है। जबकि पीडब्ल्यूडी इस पुलिया का नाकारा भी घोषित कर चुका है। इस पुलिया को राठी की मील की पुलिया के नाम से जाना जाता है। हालांकि पुलिया से रोजाना हजारों की तादाद में दुपहिया, चौपहिया वाहनों सहित भारी वाहन भी गुजरते हैं लेकिन बजट नहीं होने के कारण नई पुलिया निर्माण को लेकर पीडब्ल्यूडी बेबस नजर आ रहा है। दरअसल, यह पुलिया 35-40 साल पुरानी है और हर साल बारिश में बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिसके कारण वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिया के दोनों तरफ रैलिंग भी नहीं लगी हुई है जिसके कारण वाहन चालकों और आवारा पशुओं के नाले में गिरने की आशंका बनी रहती है। बावजूद इसके विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
पुलिया बनाने को तैयार, पर बजट ही नहीं
जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी इसके स्थान पर नई पुलिया बनाया चाहता है लेकिन बजट नहीं होने के कारण निर्माण नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही वाहनों के लिए दूसरा डायवर्ट रूट नहीं होने के कारण भी पुलिया को बंद करना मुश्किल होता जा रहा है। क्योंकि यह पुलिया इंटरस्टेट हाइवे पर स्थित है जो टोंक से मध्यप्रदेश के शिवपुरी तक जाता है। एेसे में रोजाना यहां से भारी मात्रा में वाहनों का आवागमन होता है। हालांकि विभाग की ओर से हर साल पुलिया पर सड़क का पेचवर्क किया जाता है लेकिन थोड़ी सी बारिश में ही पुलिया की सड़क फिर से क्षतिग्रस्त हो जाती है।
नहीं लगाई जा रही रैलिंग
बारिश के मौसम में तकरीबन 300 मीटर तक भारी कीचड़ में राहगीरों एवं वाहन चालकों को गुजरना पड़ता है। पुलिया पर रैलिंग के अभाव में आए दिन आवारा पशु नीचे गिर जाते हैं। पुलिया से बुधवार को सामने से भारी वाहन के कारण आ जाने के कारण गाय को नाले में गिर गई थी। बार-बार हादसों के बाद भी विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर रैलिंग नहीं लगाई जा रही है।