जयपुर

उच्च शिक्षा में “सुधरो नहीं तो बंद करो” नीति पर कार्य होगा : कुलाधिपति

बिना अनुमति कॉलेज-शिक्षण संस्था की विवि स्तर पर मान्यता दी तो कार्यवाही, राज्यपाल ने ली कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक जयपुर। राज्यपाल व कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि उच्च शिक्षा में “सुधरो नहीं तो बंद करो।” नीति पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता पर कहीं कोई समझौता नहीं […]

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Jan 22, 2026

बिना अनुमति कॉलेज-शिक्षण संस्था की विवि स्तर पर मान्यता दी तो कार्यवाही, राज्यपाल ने ली कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक

जयपुर। राज्यपाल व कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि उच्च शिक्षा में "सुधरो नहीं तो बंद करो।" नीति पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता पर कहीं कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे शिक्षण संस्थान जिनके पास शैक्षिक गुणवत्ता नहीं है, उसे बंद किया जाए। बगैर अनुमति यदि कहीं किसी कॉलेज या शिक्षण संस्था की विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता दी गई है तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। राज्यपाल बागडे बुधवार को लोकभवन में कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक में संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ किए जाने और वहां नियुक्त कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी कार्य किए जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल बागडे ने सभी विश्वविद्यालयों में नेक रैंकिंग के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नेक रैंकिंग के लिए विश्वविद्यालयों में आ रही बाधाओं को दूर किया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयवार कुलगुरुओं से नेक में आ रही अड़चनों के बारे में जानकारी लेते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शैक्षिक गुणवत्ता, पाठयक्रम और शिक्षण पद्धति में नवाचार से जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। राज्य सरकार स्तर से जुड़ी भर्ती और वित्तीय स्वीकृतियां से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी पूरा करने का जल्द प्रयास किया जाएगा। बैठक में उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा और कुलदीप रांका सहित बड़ी संख्या में अधिकारियों ने भाग लिया।

राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा पद्धति के अंतर्गत विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा के बारे में कुलगुरुओं से जानकारी लेते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्यपाल ने पुस्तकों से लुप्त, महत्वपूर्ण भारतीय इतिहास, हमारी ज्ञान परंपरा, महत्वपूर्ण विषयों को विश्वविद्यालयों में दीवार चयनित कर वहां प्रदर्शित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने यहां ऐसी व्यवस्था भी करे जिसमें पुस्तकों से बाहर के ज्ञान, कलाओं, संस्कृति के बारे में माह में दो बार या सप्ताह में एक बार विद्यार्थी अध्यापक संवाद की शुरुआत की जाए।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को दीक्षांत समारोह प्रति वर्ष आयोजित किए जाने और उसे कम से कम खर्च में संपन्न किए जाने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि नेक रैंकिंग के तहत विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों का रोस्टर बनाकर उन्हें भरने की कार्यवाही जल्द की जाएगी।

Published on:
22 Jan 2026 04:39 pm
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