जयपुर

Jaipur: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला किया रद्द, रिजर्व लिस्ट में नाम होने मात्र से नियुक्ति का अधिकार नहीं

Supreme Court upholds RPSC's Stance: जयपुर। केवल रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम होने के आधार पर अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द कर दिया ।

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Jan 17, 2026
सुप्रीम कोर्ट, पत्रिका फाइल फोटो

Junior Law Officer and Assistant Statistical Officer Recruitment: जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए रिजर्व लिस्ट में नाम होने मात्र से अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अधिकार देने से इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोकसभा आयोग के पक्ष को सही ठहराया है। यह मामला कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 व 2019 और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती- 2020 से संबंधित था। इसमें मुख्य सूची के कुछ अभ्यर्थियों के कार्यभार ग्रहण न करने के कारण रिक्त रहे पदों पर आरक्षित सूची के अभ्यर्थी नियुक्ति दिलाने की गुहार लेकर हाईकोर्ट पहुंचे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम होने के आधार पर अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें राजस्थान लोक सेवा आयोग को निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद रिजर्व लिस्ट के आधार पर नियुक्ति देने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरपीएससी के पक्ष को सही ठहराया है।

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ये है पूरा मामला

न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजस्थान लोक सेवा आयोग की अपीलों को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। आयोग के संयुक्त विधि परामर्शी राकेश ओझा के अनुसार यह मामला कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 व 2019 और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती- 2020 से संबंधित था। इसमें मुख्य सूची के कुछ अभ्यर्थियों के कार्यभार ग्रहण न करने के कारण रिक्त रहे पदों पर आरक्षित सूची के अभ्यर्थी नियुक्ति दिलाने की गुहार लेकर हाईकोर्ट पहुंचे।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने वेटिंग लिस्ट में शामिल याचिकाकर्ता यति जैन, आकृति सक्सेना और विवेक कुमार मीणा की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिसके खिलाफ आयोग की अपील हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दी। इस पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

रिजर्व लिस्ट केवल 6 माह ही वैध

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि राजस्थान सेवा नियमों के अंतर्गत आरक्षित सूची की वैधता मुख्य सूची भेजने के 6 माह तक ही वैध है। कोर्ट ने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक खुला रखा जाता है तो वह आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पात्र अभ्यर्थियों के अवसरों का हनन होगा।

कोर्ट ने कहा कि उसे अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति है, लेकिन नियमों से परे जाकर नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता। साथ ही राजस्थान लोक सेवा आयोग स्वतंत्र संवैधानिक निकाय का दर्जा मानते हुए कहा कि राज्य सरकार के अपील न करने पर भी आयोग भर्ती नियमों के पक्ष में अपील दायर कर सकता है।

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Updated on:
17 Jan 2026 10:37 am
Published on:
17 Jan 2026 09:19 am
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