
अमायरा (फाइल फोटो- पत्रिका)
Amaira Death Case: पिंक सिटी के प्रतिष्ठित 'नीरजा मोदी स्कूल' की मान्यता रद्द करने के सीबीएसई (CBSE) के फैसले पर अब राजस्थान हाईकोर्ट की एंट्री हो गई है। मासूम छात्रा अमायरा की दुखद मौत के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। क्या स्कूल की मान्यता वाकई वापस मिलेगी, या सैंकड़ों बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा? इस सवाल ने अभिभावकों और शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है।
जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने नीरजा मोदी स्कूल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और उसके सचिव को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि मान्यता रद्द होने से वहां पढ़ रहे बच्चों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।
यह मामला 3 नवंबर 2025 का है, जिसने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया था। स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा अमायरा ने कथित तौर पर चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे थे, जिनमें सबसे बड़ा आरोप 'साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़' का था। बताया गया कि घटना के तुरंत बाद उस जगह को पानी से धो दिया गया था, जिससे जांच में बाधा आई।
सीबीएसई ने सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन को आधार मानते हुए स्कूल की कक्षा 9 से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ स्कूल के अधिवक्ता रचित शर्मा ने अदालत में दलील दी कि छात्रा की मौत एक आत्महत्या थी, जिसके लिए पूरी तरह स्कूल को जिम्मेदार ठहराकर मान्यता रद्द करना गलत है। स्कूल का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से स्कूल के सैंकड़ों छात्र मानसिक तनाव में हैं और बोर्ड परीक्षाओं के करीब होने के कारण उनका भविष्य दांव पर लगा है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्कूल की लापरवाही और छात्र सुरक्षा के नियम हैं। सीबीएसई का कड़ा रुख इस बात का संकेत है कि शिक्षण संस्थानों में 'स्टूडेंट सेफ्टी' के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना स्थल को पानी से धोने जैसी कार्रवाई ने स्कूल की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े किए थे, जिसके बाद बोर्ड ने सीनियर सेकेंडरी स्तर तक का एफीलिएशन वापस लेने का कठोर निर्णय लिया।
फिलहाल, मानसरोवर स्थित इस स्कूल के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि स्कूल की मान्यता रद्द होने से केवल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि वहां पढ़ रहे निर्दोष बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं। क्या अदालत बोर्ड के फैसले को बरकरार रखेगी या छात्रों के हित को देखते हुए स्कूल को राहत प्रदान करेगी, इसका स्पष्टीकरण दो सप्ताह बाद मिलने वाले जवाब के बाद ही हो पाएगा।
Updated on:
17 Jan 2026 07:55 am
Published on:
17 Jan 2026 07:55 am
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