इंडिया एनर्जी वीक के पहले दिन मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विदेश से आए मंत्रियों, विशेषज्ञों के साथ डिस्कशन किया। इस दौरान पैनल डिस्कशन में भी शामिल हुए और मीडिया से भी कई अहम बिंदुओं पर बातचीत की।
भवनेश गुप्ता
पणजी। इंडिया एनर्जी वीक के पहले दिन मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विदेश से आए मंत्रियों, विशेषज्ञों के साथ डिस्कशन किया। इस दौरान पैनल डिस्कशन में भी शामिल हुए और मीडिया से भी कई अहम बिंदुओं पर बातचीत की।
इंडिया एनर्जी वीक के सलाहकार राजीव जैन ने बताया किएक उच्चस्तरीय नेतृत्व पैनल में वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के एक्सपर्टस ने स्पष्ट कहा कि उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में प्राकृतिक गैस और एलएनजी की भूमिका आने वाले वर्षों में और निर्णायक होगी। वक्ताओं ने इसे कोयले से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने का सबसे व्यवहारिक और तात्कालिक रास्ता बताया।
“प्राकृतिक गैस का पुनर्स्थापन और ऊर्जा परिवर्तन” विषय पर हुई चर्चा में इंडियन ऑयल, गेल, एडीएनओसी गैस और एक्सेलरेट एनर्जी के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2050 तक वैश्विक गैस मांग में 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि प्राकृतिक गैस भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का अहम आधार बनने जा रही है।
भारत के संदर्भ में पैनल ने कहा कि देश में गैस आधारित ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है।
घरेलू उत्पादन बढ़ रहा है, एलएनजी आयात के स्रोत विविध हो रहे हैं और पाइपलाइन, टर्मिनल व सिटी गैस वितरण नेटवर्क का लगातार विस्तार हो रहा है। उर्वरक, परिवहन और शहरी क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
वक्ताओं ने जोर दिया कि ऊर्जा परिवर्तन को अचानक बदलाव के बजाय ‘ऊर्जा संवर्धन’ के रूप में देखा जाना चाहिए। गैस आधारित बिजली उत्पादन को नवीकरणीय ऊर्जा का जरूरी पूरक बताते हुए कहा गया कि इससे ग्रिड को स्थिरता, लचीलापन और मांग के अनुसार आपूर्ति मिलती है।
हालांकि, पैनल ने माना कि किफ़ायती कीमत सबसे बड़ी चुनौती है। प्राकृतिक गैस और एलएनजी को कोयले के विकल्प के रूप में अपनाने के लिए इन्हें सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी होगा। इसके लिए स्थिर नीति, सहयोगी नियामक ढांचा, दीर्घकालिक वित्त, बुनियादी ढांचे की लागत में कमी और पारदर्शी वैश्विक गैस बाजार पर जोर दिया गया।
साथ ही, एलएनजी आयात क्षमता, पुनर्गैसीकरण सुविधाओं, पाइपलाइन और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के विस्तार को आवश्यक बताया गया, ताकि बढ़ती वैश्विक आपूर्ति का लाभ आम उपभोक्ता तक सुलभ और किफ़ायती ऊर्जा के रूप में पहुंच सके।