
निवाई. सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान से पूर्व आचार्यश्री के सान्निध्य में मंत्रोच्चार के बीच सौधर्म इंद्र दिलीप जैन रतलाम ने भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान शांतिनाथ का पंचामृत अभिषेक तथा शांतिधारा की। इसके बाद 300 इंद्र-इंद्राणियों ने सौधर्म इंद्र के साथ सामूहिक कलशाभिषेक कर धर्म लाभ प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के प्रवक्ता सुनील भाणजा ने बताया कि अग्रवाल मंदिर में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान सभी इंद्र-इंद्राणियों ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ 32 श्रीफल अर्घ्य समर्पित किए।
हितेश छाबड़ा ने बताया कि विधान के दौरान भोपाल के संगीतकार संजय एंड पार्टी ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर दिनेश चंवरिया, महावीर जैन, महेंद्र चंवरिया, सुशील जैन, नीरा जैन, अशोक जैन, नेमीचंद जैन, शकुंतला भाणजा, हेमा जैन, सावित्री जैन और शशी सौगानी सहित कई श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद धर्मसभा में अपने ओजस्वी प्रवचन में आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा कि भारत धर्म और संस्कृति की पावन भूमि है, जहां प्रत्येक धर्म में विधि-विधान का विशेष महत्व है। शुद्ध भाव से की गई साधना ही आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि संसार की प्रत्येक आत्मा में भगवान बनने की अनंत शक्ति विद्यमान है और सम्यक आचरण के माध्यम से हर व्यक्ति उस दिव्य अवस्था को प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम में उद्योगपति विष्णु बोहरा, हुकमचंद जैन, दिलीप बगड़ी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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एनई2307सीई-निवाई. श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान पूजा करते श्रद्धालु।