जयपुर में युवाओं का शौक उनको मौत के मुहाने तक खींचकर ले जा रहा है। ढाई साल में शहर में 128 युवा और अन्य लोगों के शव पटरियों पर मिले हैं।
राजधानी जयपुर में युवाओं का शौक अब उनको शॉक (झटका) दे रहा है। झटका भी हलका नहीं उनको मौत के मुहाने तक खींचकर ले जा रहा है। कारण हाथ में मोबाइल और कानों में ईयरफोन। तेज आवाज में गाने या फिर रील्स का चस्का उन्हें कब रेलवे ट्रैक से मौत के करीब ले जा रहा है उनको खुद को पता नहीं चलता। अंतत: एक चीख निकलती है और पटरियों पर ही सब खत्म हो जाता है। पिछले ढाई साल में शहर में 128 युवा और अन्य लोगों के शव पटरियों पर मिले हैं। इनमें से अधिकतर की मौत लापरवाही के कारण होना सामने आई है।
रेलवे ने जागरूक करने के लिए रेलवे फाटक पर बोर्ड भी लगा रखे हैं। इसमें फाटक बंद होने पर ट्रैक पार करने पर जुर्माना लगाने की बात कही गई है। अगर कोई व्यक्ति पटरियों पर बैठता है तो उस पर भी रेलवे पुलिस कार्रवाई करती है। जयपुर में रेलवे फाटक बंद होने के बाद रेलवे फाटक पार करने पर 1 हजार रुपए का जुर्माना, 6 महीने की जेल या फिर दोनों ही हो सकती है।
शहर की बात करें तो ट्रेन की चपेट में आने से कई लोग अपनी जान गंवा बैठे। वर्ष 2022 में 34 पुरुषों और एक महिला की मौत हुई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 57 तक पहुंच गया। इसमें 50 पुरुषों और 7 महिलाओं की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। रेलवे फाटक बंद होने के बाद भी अधिकतर लोग इसे पार करने से नहीं चूकते। कई बार ईयरफोन लगे होने से युवक-युवतियां ट्रेन की आवाज भी नहीं सुन पाते और चपेट में आ जाते हैं। जयपुर शहर में वर्ष 2024 में जून तक 31 पुरुष, 5 महिलाओं की मौत हो चुकी थी।
रेलवे ट्रैक पार करने वालों से समझाइश भी की जाती है। रेलवे ट्रैक पार करने वालों के खिलाफ धारा 147 के तहत चालान किए जाते हैं। वर्ष 2022 में 429 लोगों के चालान किए गए, वहीं वर्ष 2023 में 354 और वर्ष 2024 में (5 अगस्त तक) 138 लोगों के चालान किए गए।- प्रदीप कुमार, आरपीएफ थानाप्रभारी, जयपुर जंक्शन