जयपुर

आसमान में फंसे विमानों का सहारा बन रहा जयपुर एयरपोर्ट, महीने भर में 79 डायवर्ट विमान हुए लैंड

जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब CAT 3B तकनीक से उत्तर भारत का प्रमुख फ्लाइट डायवर्जन हब बन गया है।
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Updated: 2 Jan 2026, 7:54 PM IST
Jaipur International Airport
जयपुर एयरपोर्ट (पत्रिका फाइल फोटो)

जयपुर: जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अब बेहतर तकनीक और मजबूत सुविधाओं की वजह से उड़ानें डायवर्ट करने का मुख्य केंद्र बन गया है। पिछले साल दिसंबर महीने में यहां 79 उड़ानों को डायवर्ट किया गया। यह संख्या दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक के तीन महीनों में डायवर्ट हुई लगभग 80 उड़ानों के बराबर है।

जयपुर एयरपोर्ट बना बेहतरीन विकल्प

अधिकारियों के अनुसार, नई और आधुनिक सुविधाओं तथा तकनीक की मदद से जयपुर एयरपोर्ट उत्तर भारत में उड़ानों के और बेहतर लैंडिंग सुविधाओं के चलते जयपुर एयरपोर्ट देश के प्रमुख वैकल्पिक एयरपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। दिल्ली, लखनऊ, देहरादून, चंडीगढ़ और अमृतसर जैसे एयरपोर्ट्स से उड़ानें जयपुर की ओर डायवर्ट की गईं। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल थीं। पिछले महीने 70 घरेलू और 9 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों ने जयपुर की सुविधाओं का इस्तेमाल किया।

इन डायवर्जन को संभालने में एयरपोर्ट की ताकत उसकी CAT 3B वाली नेविगेशन सिस्टम है। यह सिस्टम खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग की इजाजत देता है, तब भी जब दृश्यता 300 मीटर से कम हो जाए। इसमें पूरा कोहरा होने की स्थिति भी शामिल है।

एयरपोर्ट पर उन्नत एप्रोच

एयरपोर्ट पर लाइटिंग सिस्टम लगा है और रनवे के दोनों तरफ चार-चार RVR (रनवे विजुअल रेंज) मशीनें हैं। ये घने कोहरे में भी 50 मीटर तक की दृश्यता में मदद करती हैं। जयपुर एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया, खराब मौसम के अलावा, उड़ानें डायवर्ट होने के अन्य कारणों में एयरसाइड और रनवे पर लगातार हो रहा सुधार शामिल है। नई तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ बेहतर तालमेल करते हैं, जिससे डायवर्जन का काम आसानी से चलता है।

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2 Jan 2026, 7:54 PM IST
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