
जयपुर। गोविंददेवजी मंदिर के पीछे तालकटोरा झील में नौकायन का सपना टूटता नजर आ रहा है। वर्क ऑर्डर के 4 माह बाद भी तालकटोरे में नाव नहीं चल पाई। प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता तो लोगों को शहर में नौकायन की सुविधा मिलती, वहीं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता। लोग नौकायन के दौरान ही यहां लंच व डिनर कर पाते, लेकिन यह प्रोजेक्ट अटक गया है।
शहर के बीचों—बीच स्थित तालकटोरा झील वर्षों बाद भरने से सरकार ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्लान तैयार किया। इसके तहत जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने यहां 13.28 करोड़ रुपए खर्च कर इसके स्वरूप को लौटाया। काम होने के बाद तालकटोरा झील में नौकायन का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। झील में पीपीपी मोड पर नाव चलाने के लिए स्मार्ट सिटी ने पिछले साल सितंबर में टेंडर किए और 5 अक्टूबर को संबंधित फर्म को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया, लेकिन 4 माह बाद भी नौकायन शुरू नहीं हो पाया है।
साल 2031 तक का करार, धरा रह गया
तालकटोरा में पीपीपी मोड पर नौकायन चलाने के लिए संबंधित फर्म से वर्ष 2031 तक का करार किया गया। इसके तहत यहां डबल डेकर बोट, मोटर बोट, पेडल बोट आदि चलाने थी, डबल डेकर बोट में रेस्टोरेंट भी संचालित होता, इससे लोग नौकायन के साथ नाव में ही लंच, डिनर व ब्रेकफास्ट आदि कर पाते। प्लान के तहत तालकटोरा झील में करीब आधे घंटे तक लोग नौकायन कर पाते। हालांकि इसके लिए लोगोें को 40 रुपए से लेकर 800 रुपए चुकाने पड़ते। वहीं विदेशी सैलानियों को 500 रुपए से लेकर 1600 रुपए चुकाने पड़ते, लेकिन काम शुरू नहीं होने प्लान धरा रह गया।
कर रहे कार्यवाही
जयपुर स्मार्ट सिटी सीईओ अभिषेक सुराणा का कहना है कि तालकटोरा झील में नौकायन का काम शुरू नहीं करने को लेकर हमने ठेकेदार के खिलाफ विधि सम्मत कार्यवाही कर रहे है, ताकि जल्द से जल्द तालकटोरा में नौकायन का काम शुरू हो सके।
अब हेरिटेज निगम को सौंपने की तैयारी
जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड डेढ़ साल में तालकटोरे में नौकायन शुरू नहीं कर पाया। हाल ही हुई स्मार्ट सिटी की बोर्ड मिटिंग में यह मामला उठा। तालकटोरे में नाव संचालन और इसके सौंन्दर्यन का काम हैरिटेज नगर निगम को सौंपने पर चर्चा की गई।