
Jaipur Deputy Mayor Election: महापौर की कुर्सी के लिए बीजेपी ने सुनील कोठारी और कांग्रेस ने सुनीता मावर को मैदान में उतारकर तस्वीर साफ कर दी है। अब निगम की अगली बड़ी कुर्सी यानी उप-महापौर को लेकर बीजेपी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कोठारी के परकोटे से होने के बाद पार्टी की नजर ऐसे चेहरे पर है, जिससे आउटर के साथ सामाजिक समीकरण भी साधे जा सकें।
उप-महापौर की कुर्सी के लिए पिछले दो दिन से भवानी सिंह राजावत का नाम सोशल मीडिया पर तेजी से चल रहा है। अनारक्षित वर्ग से दीपा नाथावत का नाम भी चर्चा में है। मूल ओबीसी समीकरण को देखते हुए कई नाम चल रहे है। उप-महापौर की रेस में कांग्रेस ने अब तक पत्ते नहीं खोले है। माना जा रहा है कि महापौर चुनाव का परिणाम देखने के बाद ही कांग्रेस आगे की रणनीति पर काम करेगी।
महापौर पद पर परकोटे के सुनील कोठारी को मौका मिलने के बाद उप-महापौर के लिए आउटर क्षेत्र से चेहरा उतारने की चर्चा है। राजपूत, ब्राह्मण, सैनी और यादव समाज के नामों पर अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है। महापौर के दावेदार रहे अन्य पार्षदों में से भी उप-महापौर बनाने की चर्चा है। इनमें शैलेंद्र भार्गव, विमल अग्रवाल, अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल प्रमुख हैं।
सिविल लाइंस के वार्ड-89 से दूसरी बार पार्षद बने भवानी सिंह राजावत पहले निगम चेयरमैन भी रह चुके हैं। संगठन में भी उनकी सक्रियता रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर नाम चलने के बावजूद पार्टी स्तर पर उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दीपा नाथावत: वार्ड-47 से पहली बार चुनाव जीती हैं। वे मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। राजपूत, सवर्ण समाज के समीकरण को देखते हुए भी उनके नाम पर चर्चा की जा रही है।
गजेंद्र सिंह चिरानाः वार्ड-36 से जीत हासिल की है। पिछले बोर्ड में वे चेयरमैन भी रह चुके हैं। मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के करीबियों में गिने जाते हैं।
राजेंद्र सैनीः वार्ड-12 से चुनाव जीते हैं और दो दशक से सक्रिय हैं। पत्नी रश्मि सैनी ग्रेटर निगम में उप महापौर चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
पलक यादवः वार्ड-10 से बीजेपी की जेन-जी पार्षद हैं। पिता पिछली बार पार्षद रह चुके हैं। मूल ओबीसी वर्ग के समीकरण में फिट हैं।
विकास बारेठः वार्ड-23 से जीते हैं। ग्रेटर निगम में चेयरमैन रह चुके हैं।
नगर पालिका एक्ट की धारा-43 के अनुसार दो उपमहापौर का प्रावधान नहीं है। दो उप महापौर बनाने से पहले अधिनियम में संशोधन करना होगा।
-अशोक सिंह, पूर्व विधि निदेशक