20 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जयपुर मेयर चुनाव: यूं तय हुआ सुनील कोठारी के BJP से महापौर प्रत्याशी बनने का सफर, जानें क्या है परकोटा कनेक्शन?

Jaipur Mayor Election: जयपुर महापौर पद के लिए भाजपा ने सुनील कोठारी को प्रत्याशी बनाया है। संगठन से पुराने जुड़ाव, परकोटे से कनेक्शन और व्यापारियों के बीच सक्रियता को उनके चयन के प्रमुख पहलुओं में माना जा रहा है।
3 min read
Google source verification
sunil kothari jaipur bjp mayor candidate

भाजपा ने सुनील कोठारी को जयपुर महापौर पद के लिए प्रत्याशी चुना (Photo-Patrika)

जयपुर. भाजपा की ओर से महापौर प्रत्याशी का नाम तय करने से पहले सत्ता-संगठन स्तर पर दावेदारों को कई कसौटियों पर परखा गया। शहर में स्वीकार्यता, परकोटे की चुनौतियों की समझ, विधायकों की सहमति और आगे की राजनीतिक भूमिका जैसे पहलुओं पर पड़ताल हुई। इसी प्रक्रिया में सुनील कोठारी का नाम प्रमुखता से उभरा। सहज और सरल स्वभाव के साथ व्यापारियों से उनके जुड़ाव को उनकी स्वीकार्यता के पक्ष में देखा गया। परकोटे को लेकर उनकी सक्रियता भी महत्वपूर्ण रही। हवेलियों, विरासत को बचाने के लिए वे पहले अभियान चला चुके हैं।

कोठारी करीब दो-ढाई दशक से भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका जुड़ाव है। पिछली बार जयपुर में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के कार्यक्रम की जिम्मेदारी भी उनके पास रही थी। महापौर पद के लिए वैश्य समाज से चेहरा तय किए जाने की चर्चा के बीच कोठारी इस सामाजिक समीकरण में भी फिट बैठे।

एक विधायक का विरोध पुनीत को पड़ा भारी

मालवीय नगर के वार्ड 76 से पार्षद पुनीत कर्णावट दूसरे प्रमुख दावेदार थे। वे विधायक कालीचरण सराफ की इच्छा के विपरीत पार्षद का टिकट पाने में कामयाब रहे। टिकट के समय विधायक अपने नजदीकी कुलदीप मिश्रा को पार्टी का सिंबल देकर खुलेआम सामने आ गए थे। हालांकि उन्होंने इसे गलतफहमी बताया था।

अंदरखाने पहले ही चर्चा में था नाम

बताया जा रहा है कि संघ की ओर से उनका नाम मुख्यमंत्री ने ही चुनाव संचालन समिति की बैठक में प्रत्याशी के रूप में आगे रखा था। मुख्यमंत्री आवास पर उनकी आवाजाही और संगठनात्मक व सामाजिक कार्यों में भागीदारी भी पहले से रही है। यही वजह रही कि पार्षद प्रत्याशी के रूप में उनका चयन होने के साथ ही महापौर की संभावित दौड़ में उनका नाम अंदरखाने चर्चा में आ गया था। उनके नाम के साथ संगठन से पुराना जुड़ाव, वैश्य समाज, व्यापारियों के बीच संपर्क, संघ से निकटता और जयपुर के विरासत क्षेत्र से जुड़ी सक्रियता जैसे कई समीकरण एक साथ साधे गए।

दावेदारों के साथ विधायकों के समीकरण भी देखे

नाम तय करते समय एक और महत्वपूर्ण पहलू विधायकों की स्वीकार्यता का था। संगठन ने यह भी देखा कि किस दावेदार के नाम पर स्थानीय विधायक आपत्ति कर सकते हैं और किसके चयन से भविष्य में राजनीतिक खींचतान की स्थिति बन सकती है।

परकोटे में चुनौतियां बड़ी

परकोटे में विरासत, यातायात, पार्किंग, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में महापौर प्रत्याशी के लिए ऐसा चेहरा तलाशा जा रहा था, जिसकी पुराने जयपुर में सामाजिक-सियासी पकड़ हो।

'रघुनाथ' बने सारथी

महापौर प्रत्याशी का नाम तय करने के साथ ही पार्टी के सामने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती भी है। इसके लिए मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र रघुनाथ अग्रवाल नरेड़ी को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी पार्षदों को पुष्कर ले जाने की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। बाद में 4 प्रमुख दावेदारों सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, विमल अग्रवाल और शैलेन्द्र भार्गव को पुष्कर से गोपनीय तरीके से प्रदेश भाजपा कार्यालय तक लाने में भी नरेड़ी सारथी बने। सुनील कोठारी समेत चारों प्रमुख दावेदार सीधे प्रदेश कार्यालय पहुंचे और संगठन महामंत्री अजय कुमार से मुलाकात की। वे कार्यालय में करीब 1 घंटे 18 मिनट रहे। इसके बाद कोठारी नामांकन के लिए प्रदेश कार्यालय से रवाना हुए। नामांकन के लिए निकलने से पहले कोठारी ने गणेशजी को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

जो चुने गए, वे भी हमारे क्षेत्र में रहते हैं: सराफ

प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी के एकमात्र विधायक कालीचरण सराफ भी पहुंचे। सराफ पुनीत कर्णावट को पार्षद का टिकट देने और उन्हें महापौर प्रत्याशी बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे। मीडिया ने सराफ से पूछा कि, 'आपके क्षेत्र से दावेदार पार्षद को नहीं चुना गया' तो उन्होंने सीधे कहा, 'जो चुने गए हैं, वे भी उन्हीं के क्षेत्र में रहते हैं।'

चलता रहा आरोप, प्रत्यारोप का दौर

कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा ने दावा किया कि भाजपा के 20 पार्षद हमारे संपर्क में हैं। इस बार आंकड़े हमारे पक्ष में जाएंगे। 25 सितम्बर को नतीजे चौंकाने वाले होंगे। भाजपा को यदि क्रॉस वोटिंग का डर नहीं है तो फिर किलेबंदी क्यों की गई है?

वहीं, पूर्व उप महापौर पुनीत कर्णावट ने कहा कि भाजपा के 78 पार्षदों के साथ कुल 90 से 95 मत हमारे प्रत्याशी के पक्ष में पड़ेंगे। विधायक कालीचरण सराफ ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि भाजपा को महापौर चुनाव में 100 से ज्यादा वोट मिलेंगे, लेकिन वे यह नहीं बता पाए कि 78 पार्षदों की संख्या के बाद बाकी वोट कहां और कैसे मिलेंगे।

नामांकन नहीं कर पाईं फिरोजा

नगर निगम महापौर पद के लिए नामांकन करने पहुंचीं फिरोजा बानो ने प्रशासन पर मनमानी के आरोप लगाए। एआईएमआईएम के समर्थन से वार्ड 146 से चुनाव जीतीं फिरोजा ने आरोप लगाया कि समय पर निगम मुख्यालय पहुंचने के बावजूद प्रशासन ने उनका नामांकन स्वीकार नहीं किया।