जयपुर

जयपुर में बेतहाशा बढ़ रहे वाहन, पार्किंग संकट से आमजन परेशान, लोगों को पता ही नहीं चल रहा कब हो गया चालान

जयपुर में वाहन बढ़ते जा रहे हैं, पार्किंग की कमी से आम जनता परेशान है। निगम सड़क किनारे पार्किंग वसूल रहा है तो वहीं ट्रैफिक पुलिस एप से रोज़ाना 400 तक चालान कर रही है।

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Sep 15, 2025

Jaipur News: राजधानी जयपुर में बेतहाशा बढ़ रही वाहनों की संख्या, अपर्याप्त पार्किंग के बीच यातायात पुलिस सड़क किनारे नो पॉर्किंग के चालान धड़ल्ले से काट रही है। हालात यह हैं कि बाजार, सरकारी और निजी कार्यालयों में पर्याप्त पार्किंग नहीं होने पर वहां आने-जाने वाले वाहन चालक अपना वाहन सड़क किनारे पार्क करते हैं तो कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर चालान का मैसेज आ जाता है।


मैसेज आने के बाद वाहन मालिकों को पता चलता है कि उनकी गाड़ी का चालान हो गया है। 200 रुपए से लेकर 400 रुपए के चालान पंजीकृत मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आम आदमी के लिए सड़क किनारे वाहन पार्क करना गुनाह है।

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वहीं, नगर निगम शहर में कई स्थानों पर सड़क किनारे पार्किंग के ठेके देकर कमाई कर रहा है। राजस्थान पत्रिका टीम ने शहर के बाजारों सहित सरकारी और निजी कार्यालयों की पड़ताल की तो सामने आया कि वाहन पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण भी लोग सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर हैं।


परकोटे के लिए पार्किंग हुई विकसित, बाकी शहर भूले


जौहरी बाजार, किशनपोल बाजार और चौड़ा रास्ता की सड़कों पर निगम पार्किंग करवा रहा है। स्मार्ट सिटी में जो पार्किंग विकसित की हैं, वे भी परकोटे को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। ऐसे में बाकी शहर में पार्किंग पर ध्यान ही नहीं दिया गया। वहीं, बाहर की बात करें तो जयपुरिया अस्पताल में जरूर पार्किंग विकसित की गई है, लेकिन इसका उपयोग मरीज और उनके परिजनों के अलावा चिकित्सक करते हैं।


जेडीए की पार्किंग पड़ रही छोटी


पत्रिका संवाददाता कुछ रोज पहले जेडीए पहुंचा। यहां दो बजे तक मल्टीस्टोरी पार्किंग फुल थी। लोग गाड़ी जेडीए के सामने सड़क किनारे खड़ी कर रहे थे। लोगों ने बताया कि यहां यातायात पुलिसकर्मी गाड़ियों के चालान कर देते हैं। जबकि, जिस हिस्से में गाड़ियां खड़ी होती हैं। वहां पर यातायात किसी भी प्रकार से बाधित नहीं होता। शाम को इसी हिस्से में ठेले वाले खड़े होते हैं। जबकि नगर निगम ने करीब चार वर्ष पहले इसका टेंडर भी दिया था और पार्किंग भी संचालित की गई थी।


यह करना चाहिए


जो जगह अनुपयोगी है, वो पार्किंग के लिए आरक्षित कर दें। यातायात बाधित न हो, इसको ध्यान में रखते हुए सफेद पट्टी खींच दें और पट्टी से बाहर जो गाड़ियां खड़ी हों, उनके चालान किए जाएं।


व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में जगह नहीं


राजधानी में कई व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स ऐसे हैं, जिनमें पार्किंग नहीं है। ऐसे में यहां आने वाले वाहन सड़क पर ही खड़े हो रहे हैं। हालांकि, जब इन कॉम्प्लेक्स के नक्शे जेडीए या निगम से स्वीकृत करवाए गए, उस समय सभी में पार्किंग का प्रावधान किया गया था।


जैसे-जैसे निर्माण हुआ तो मिलीभगत से पार्किंग स्पेस को ऊंचे दाम पर बेचकर करोड़ों रुपए कमा लिए गए। परकोटा में जो कॉम्प्लेक्स बनाए गए, उनमें से ज्यादातर में पार्किंग नहीं है। यही हाल मालवीय नगर से लेकर जगतपुरा और वैशाली नगर से लेकर मानसरोवर का है।


यहां निगम ने सड़कें ही दे दीं किराए पर


संवाददाता परकोटे में पहुंचा तो यहां ज्यादातर बाजारों में सड़क किनारे पार्किंग मिली। निगम करोड़ों रुपए लेकर सड़कें किराए पर दे रहा है। यही हाल ग्रेटर नगर निगम का भी है। यहां निगम मुख्यालय के तीन ओर सड़क और फुटपाथ पर पार्किंग हो रही है। जहां निगम पार्किंग वसूल रहा है।


यहां पर भी आकर देखो


-सचिवालय के सामने।
-कलक्ट्रेट सर्कल के चारों ओर।
-सेंट्रल पार्क के आसपास


ये हो तो बने बात


-मल्टी-लेवल पार्किंग बनाई जाएं ताकि, लोगों को आस-पास ही पार्किंग मिल सके।
इस तरह की पार्किंग नाले की ऊपर बनाई जा सकती हैं। इससे अतिरिक्त जगह की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्थानीय लोगों को नाले की दुर्गंध से राहत मिलेगी।


राजधानी में प्रमुख पार्किंग स्थल


-चौगान स्टेडियम में दोपहिया 320 और चारपहिया 310
-चांदपोल अनाज मंडी में दोपहिया 220 और चारपहिया 350
-रामनिवास बाग में दोपहिया 600 और चारपहिया 2460
-जयपुरिया अस्पताल में दोपहिया 400 और चारपहिराय 200
-हाईकोर्ट के सामने दोपहिया 250 और चारपहिया 525


एक नजर इधर भी


-जयपुर में 30 लाख से अधिक वाहन
-जयपुर शहर में 12 फीसदी की दर से हो रही सालाना बढ़ोतरी
-400 चालान अधिकतम रोज कर रही ट्रैफिक पुलिस
-नो पार्किंग में खड़े वाहनों का एप के जरिए हो रहा चालान
-हर पुलिसकर्मी के मोबाइल पर इंस्टॉल है एप


वैशाली नगर में भी पार्किंग की समस्या विकराल हो चुकी है। मुख्य सड़कों पर जाम रहने लगा है। कई बार तो ग्राहक पार्किंग न होने की वजह से लौट जाते हैं।
-किशनलाल गुप्ता, वैशाली नगर


शाम को 80 फीट रोड से निकलना मुश्किल हो जाता है। परकोटे में जाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। कई चक्कर लगाने के बाद पार्किंग मिल पाती है।
-पल्लवी विजयवर्गीय, महेश नगर


शहर में डेढ़ लाख से अधिक पार्किंग स्लॉट की जरूरत


आवासीय इलाकों में बाजार विकसित हो रहे हैं। कई जगह कैफे और बार खुलने से बुरा हाल हो गया। नगर नियोजन विभाग की प्लानिंग में गड़बड़ है। जब इमारत बनती है तो निर्माण के दौरान जिमेदार विभाग ध्यान नहीं रखते। अनुमान के मुताबिक शहर में डेढ़ लाख से अधिक पार्किंग स्लॉट की जरूरत है। लेकिन, जयपुर में यह संख्या सीमित है। पार्किंग स्पेस व्यवस्थित भी नहीं है।

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Published on:
15 Sept 2025 11:13 am
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