
जयपुर से लगे जोबनेर इलाके के महेशवास क्षेत्र स्थित पत्थरों की एक खान अचानक भरभराकर ढह गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए। यह हादसा करीब 60 फीट ऊंची पहाड़ी से अचानक हजारों टन पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़ों के नीचे खिसकने के कारण हुआ। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और भारी धूल का गुबार उठ गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत एजेंसियों में हड़कंप मच गया और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे की चपेट में आए एक घायल मजदूर को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, दूसरे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और सिविल डिफेंस की टीमें युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं।
मौके पर आधा दर्जन से अधिक जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से भारी पत्थरों को हटाने का काम लगातार जारी है ताकि फंसे हुए दूसरे मजदूर तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
इस खौफनाक हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने खान संचालकों और प्रबंधकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह दुर्घटना होने के करीब 3 घंटे बाद तक प्रशासन को इसकी आधिकारिक सूचना नहीं दी गई, जिससे राहत कार्य समय पर शुरू होने में देरी हुई।
इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने महेशवास पहाड़ी पर लंबे समय से अवैध खनन किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सुरक्षा मानकों के चलाई जा रही इन खानों के कारण ही आज मजदूरों की जान खतरे में पड़ी है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जयपुर जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी देर रात से ही घटनास्थल पर डेरा डाले हुए हैं। राहत और बचाव अभियान की निगरानी के लिए सांभर उपखंड अधिकारी (SDM) ऋषिराज कपिल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नीरज पाठक पूरी टीम के साथ मौके पर डटे हुए हैं।
इसके अलावा जोबनेर के पुलिस उपअधीक्षक (DSP) पन्नालाल जांगिड़, रेनवाल थानाधिकारी राजेंद्र कुमार, मौखमपुरा थानाधिकारी सुरेश गुर्जर और फुलेरा थानाधिकारी हीरालाल सैनी सहित भारी पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात किया गया है।
अधिकारियों की देखरेख में रेस्क्यू टीमों को पूरी सावधानी के साथ मलबे को हटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पत्थरों के नीचे दबे दूसरे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे व्यक्ति की जान बचाना है, और उसके बाद अवैध खनन व सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।