जयपुर

Jaipur Literature Festival: संजय के. रॉय के साथ बातचीत में ग्रीफ, आलोचना, संघर्ष और कलाकार होने की सच्चाई पर खुलकर बोले वीर दास

Jaipur Literature Festival: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कॉमेडियन-लेखक वीर दास ने अपनी किताब द आउटसाइडर पर बातचीत में जिंदगी, करियर और आलोचना पर खुलकर विचार रखे। ग्रीफ को निजी अनुभव बताया और ‘द टू इंडियाज’ विवाद पर कहा कि भाषण को पूरा नहीं सुना गया।

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Jan 18, 2026
एमी अवॉर्ड विजेता वीर दास (फोटो- पत्रिका)

Jaipur Literature Festival 2026: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मशहूर कॉमेडियन, अभिनेता और लेखक वीर दास अपनी किताब ‘द आउटसाइडर-अ मेमॉयर फॉर मिसफिट्स’ को लेकर संजय के. रॉय के साथ बातचीत की। यह सत्र सिर्फ किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें उनकी जिंदगी, करियर के उतार-चढ़ाव, आलोचना और कला को लेकर सोच खुलकर सामने आई।

ग्रीफ यानी दुख पर बात करते हुए वीर दास ने इसे बेहद निजी अनुभव बताते हुए कहा, 'ग्रीफ वो स्थिति है जब इंसान ठीक से सांस भी नहीं ले पाता, क्योंकि सीने में कोई और चीज ठहरी रहती है।' इस बात पर पूरे हॉल ने तालियों के साथ सहमति दर्ज की। एमी अवॉर्ड जीतने के अनुभव पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी और यह उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था।

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‘द टू इंडियाज’ भाषण के बाद हुई आलोचना पर वीर दास ने साफ कहा कि लोगों ने उनके पूरे भाषण को नहीं सुना। सोशल मीडिया पर सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा साझा किया गया, जिससे पूरी बात का संदर्भ खो गया और आलोचना का दायरा बहुत बढ़ गया।

बातचीत के दौरान वीर दास ने अपने शुरुआती करियर से जुड़े कई किस्से भी साझा किए। दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में अपने पहले शो से लेकर फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के लिए लिखने के शुरुआती दिनों तक की यादें उन्होंने सहज अंदाज में सुनाईं। किताब में शामिल बचपन और स्कूल के दिनों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे पहले अर्थशास्त्री बनना चाहते थे, लेकिन एक प्रोफेसर ने उनकी सोच और दिशा बदल दी और उन्हें थिएटर की ओर मोड़ दिया।

कॉमेडी को करियर के रूप में चुनने को लेकर वीर दास ने कहा कि यह रास्ता आसान नहीं होता। कॉमेडी क्लब्स का माहौल अलग होता है और इस क्षेत्र में टिके रहने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है।

युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, 'अपनी कला में सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं है, लोगों के बीच अपनी पहचान बनानी भी जरूरी है।' सत्र के अंत में वीर दास ने कहा कि किसी भी कला को तब ही चुने जब आप हर उसी के ख्वाब लिए हर रोज जागें। कलाकार बनने में आपका सब कुछ आपसे छिन जाता है।

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