
राजधानी की सड़कों पर दौड़ रही लो-फ्लोर बसों में यात्री पूरा किराया चुका रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का सबसे अहम दस्तावेज ही गायब है। पत्रिका ने शहर में संचालित लो-फ्लोर बसों के दस्तावेजों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। चार बसों के दस्तावेजों में प्रदूषण प्रमाणपत्र और फिटनेस तो मिले, लेकिन बीमा नहीं मिला। इसके बावजूद ये बसें नियमित रूप से यात्रियों को लेकर अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही हैं।
सवाल है कि बिना वैध बीमा के बसों को सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिल रही है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है? क्योंकि मामला सिर्फ बसों के संचालन का नहीं, हादसे की स्थिति में यात्रियों के बीमा और मुआवजे का भी है। दूसरी तरफ पुरानी बसों की संचालन अवधि बढ़ाई जा रही है और नई ई-बसें आरटीओ पंजीकरण के इंतजार में खड़ी हैं।
रूट नंबर 1: आरजे 14 पीडी 8539: दौलतपुरा से गलता तक चल रही इस बस का प्रदूषण प्रमाणपत्र और फिटनेस है, लेकिन बीमा नहीं है।
लो-फ्लोर रूट 26: आरजे 14 पीडी 8017: चांदपोल से बगरू चलने वाली इस बस का भी प्रदूषण प्रमाणपत्र मौजूद है, लेकिन बीमा नहीं है।
रूट 9ए: आरजे 14 पीडी 7961: अग्रवाल फार्म से दादी का फाटक जाने वाली इस बस का प्रदूषण संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन बीमा नहीं है।
रूट 15: आरजे 14 पीडी 7992: चांदपोल से चौमू चलने वाली इस बस का भी प्रदूषण प्रमाणपत्र है, लेकिन बीमा नहीं है। इस रूट पर रोज सैकड़ों यात्रियों की आवाजाही रहती है।
जेसीटीएसएल के पुराने बेड़े की बसों की संचालन अवधि बढ़ाकर उन्हें सड़क पर रखा जा रहा है। इन बसों में गियर खराब होने, बॉडी गलने और तकनीकी खराबियों के मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को बस नंबर 7997 रूट 9ए पर चलते-चलते बंद हो गई, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। ऐसे में सवाल है कि पुरानी बसों की मियाद बढ़ाते समय उनकी वास्तविक तकनीकी स्थिति की जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है।
नगर निगम चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले धमधड़ाके के साथ ई-बसों को हरी झंडी दिखाई गई थी, लेकिन आमजन को फायदा नहीं मिला। पिछले 25 दिन से आरटीओ से पंजीकरण नंबर नहीं मिलने के कारण ई-बसों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, पुरानी बसों की मियाद बढ़ाकर चलाया जा रहा है। सवाल है कि पंजीकरण में तेजी क्यों नहीं लाई जा रही?
"बिना बीमा बसों का संचालन नहीं हो सकता। हमने अभी संचालन की अवधि बढ़ाई है। अगर निजी फर्म ने बीमा नहीं कराया है तो निर्देश दिए जाएंगे। ई-बसों के पंजीकरण का काम निजी फर्म का है, जिसे जल्द कराने को कहा है। पंजीकरण के बाद बस संचालन शुरू किया जाएगा।"— नारायण सिंह, एमडी, जेसीटीएसएल