
जयपुर के नगर निगम में अगले महापौर की ताजपोशी को लेकर राजनीतिक मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। रिटर्निंग अधिकारी आशीष कुमार द्वारा नामांकन पत्रों की जांच के बाद जारी आधिकारिक सूची के अनुसार अब जयपुर मेयर पद के लिए कुल 4 अभ्यर्थी मैदान में रह गए हैं। मुख्य मुकाबला जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधिकृत प्रत्याशी सुनील कोठारी और इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) की वरिष्ठ नेत्री सुनीता गुप्ता मावर के बीच माना जा रहा है, वहीं दो निर्दलीय उम्मीदवारों—दशरथ अटल और सुनीता मेठी —ने भी पर्चा दाखिल कर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है। हालांकि दशरथ अटल और सुनीता मेठी वास्तव में निर्दलीय प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि ये दोनों कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित पार्षद हैं जिन्होंने रणनीतिक तौर पर (कवरिंग कैंडिडेट के रूप में) जयपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए नामांकन भरा है।
राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार जयपुर नगर निगम के मेयर चुनाव के लिए प्रत्याशियों के पास नाम वापस लेने का अंतिम समय आज यानी 22 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक है। दोपहर 3 बजे की समय सीमा समाप्त होने के तुरंत बाद चुनाव मैदान में शेष बचे सभी वैध उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति साफ हो जाएगी और निर्वाचन आयोग उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिह्न (सिंबल) आवंटित कर देगा।
दशरथ अटल और सुनीता मेठी के पास नाम वापस लेने का समय है, अन्यथा वे चुनावी मतपत्र पर निर्दलीय के रूप में दिखेंगे। मेयर पद के लिए मतदान 25 सितंबर 2026 को होना तय हुआ है।
जयपुर नगर निगम के अध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए तय कार्यक्रम के अनुसार 21 सितंबर को रिटर्निंग अधिकारी आशीष कुमार की देखरेख में जमा किए गए नामांकन पत्रों की गहन जांच की गई। संवीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चारों उम्मीदवारों के नामनिर्देशन पत्र विधिमान्य पाए गए। निर्वाचन कार्यालय की ओर से चारों प्रत्याशियों की औपचारिक सूची चस्पा कर दी गई है।
रिटर्निंग अधिकारी आशीष कुमार के अनुसार, मैदान में डटे चारों उम्मीदवार अलग-अलग वर्गों और राजनीतिक पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के गणित पर नजर डालें तो भाजपा के पास 78 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत है, जबकि कांग्रेस के पास 57 सीटें और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं। ऐसे में किसी निर्दलीय प्रत्याशी का महापौर बनना व्यावहारिक रूप से संभव नजर नहीं आता। इसके बावजूद दो निर्दलीयों द्वारा फॉर्म भरे जाने के पीछे क्रॉस-वोटिंग कराने या आखिरी समय में रणनीतिक वोट काटने के कयास लगाए जा रहे हैं।
क्रॉस वोटिंग और सेंधमारी के डर से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को शहर से दूर रिजॉर्ट्स में बाड़ेबंदी में रखा हुआ है। भाजपा ने जहां अपने पार्षदों को एकजुट रखा है, वहीं कांग्रेस भी अपने 57 पार्षदों के साथ 15 निर्दलीयों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि 25 सितंबर को होने वाले मतदान में उलटफेर किया जा सके।
नामांकन वापस लेने की समयसीमा समाप्त होने के बाद यदि चारों उम्मीदवार मैदान में बने रहते हैं, तो 25 सितंबर को जयपुर नगर निगम मुख्यालय में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। मतदान प्रक्रिया संपन्न होते ही दोपहर 2 बजे के बाद वोटों की गिनती शुरू की जाएगी और शाम तक यह साफ हो जाएगा कि जयपुर का अगला प्रथम नागरिक कौन बनेगा।