
Jaipur Northern Ring Road Project: जयपुर। जयपुर की प्रस्तावित नॉर्थ रिंग रोड परियोजना से प्रभावित गांवों के किसान खरीफ सीजन की बुवाई को लेकर असमंजस में है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने और अब तक नोटिस जारी नहीं किए जाने से किसानों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे खेती करें या सड़क निर्माण की तैयारी करें। राजपुरा, कोदर, केसरी सिंहपुरा सहित आसपास के गांवों में जयपुर नॉर्थ रिंग रोड के लिए मिट्टी के नमूने लिए जा चुके है और संभावित प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन भी किया गया है।
इसके बावजूद किसानों को न तो भूमि अधिग्रहण का नोटिस मिला है और न ही परियोजना शुरू होने की समय-सीमा की कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है। किसान राकेश जोशी, सुमित गौड़, राजेश चौधरी और रामस्वरूप निठारवाल का कहना है कि खरीफ फसल की बुवाई का समय शुरू हो चुका है। किसान महंगे दामों पर खाद-बीज खरीद रहे हैं। यदि अब बुवाई कर दी जाती है और बाद में सड़क निर्माण शुरू होता है तो फसल और किसानों दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं यदि बुवाई नहीं की जाती तो पूरा कृषि सीजन प्रभावित होगा।
किसान नेता कैलाशचंद चौधरी ने सरकार से मांग की है कि नॉर्थ रिंग रोड निर्माण की तिथि और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल स्पष्ट की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित और समयबद्ध मुआवजा दिए बिना निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य का छह गुना मुआवजा देने की मांग भी उठाई।
किसान भूमि अधिग्रहण के नोटिस का इंतजार कर रहे है। साथ ही खरीफ फसल की बुवाई को लेकर असमंजस की स्थिति में है। राजपुरा, कोदर और केसरी सिंहपुरा सहित कई गांव परियोजना की जद में है। किसान संगठनों ने पहले मुआवजा और फिर रिंग रोड का निर्माण कार्य शुरू करने की मांग उठाई है।
करीब 3 हजार करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 100 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसे दो हिस्सों में तैयार किया जाना है। इसमें 45 किमी का हिस्सा आगरा रोड से सी-ज़ोन बाइपास तक और 52 किमी का हिस्सा बाइपास से अजमेर रोड तक प्रस्तावित है।
6 लेन वाला नॉर्थ रिंग रोड अजमेर रोड पर छितरोली से आगरा रोड बस्सी तक बनेगा, जो शहर के भारी ट्रैफिक को कम करेगा। प्रोजेक्ट की कुल लागत 3,000 करोड़ रुपए है। यह कॉरिडोर दिल्ली रोड, कालवाड़, जोबनेर, रामपुरा डाबड़ी, जालसू और चोमू जैसे क्षेत्रों को जोड़ेगा। इस परियोजना के लिए लगभग 662 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके लिए 150 से अधिक गांव प्रभावित होंगे।