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जयपुर में मकान-फ्लैट खरीदने से पहले जान लें, निर्माण शुल्क और DLC बढ़ने से कितना बढ़ जाएगा आपका खर्च

Jaipur Property News: राजधानी जयपुर में अपने आशियाने का सपना देख रहे लोगों के लिए मकान और फ्लैट खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है।
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Jul 15, 2026
Jaipur Property News
जयपुर में मकान और फ्लैट खरीदना और महंगा। Photo: AI

जयपुर। राजधानी जयपुर में अपने आशियाने का सपना देख रहे लोगों के लिए मकान और फ्लैट खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। सरकार ने पहले भवन निर्माण शुल्क (कंस्ट्रक्शन चार्ज) 1200 रुपए से बढ़ाकर 1800 रुपए प्रति वर्गफीट कर दिया। इससे बिल्डरों की निर्माण लागत पहले ही बढ़ चुकी थी। अब जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) की दरों में दूसरी बार संशोधन के प्रस्तावों ने आम लोगों पर एक और आर्थिक बोझ डाल दिया है।

रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण शुल्क बढ़ने के बाद अधिकांश बिल्डरों ने अपनी परियोजनाओं की कीमतों में इसका असर जोड़ना शुरू कर दिया था। अब डीएलसी दरों में बढ़ोतरी होने से जमीन की सरकारी कीमत भी बढ़ जाएगी। रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पहले की तुलना में अधिक देना होगा। यानी मकान की अंतिम कीमत कई स्तरों पर बढ़ जाएगी।

तीन महीने में दूसरी बार संशोधन पर सवाल

अप्रेल में करीब 10 प्रतिशत डीएलसी दरें बढ़ाई गई थीं। महज तीन महीने में फिर से संशोधन के प्रस्ताव सामने आए है। जबकि वर्ष 2025 में डीएलसी दरों में एक बार भी संशोधन नहीं किया गया था। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अप्रेल में ही नई दरें तय कर दी गई थीं, तो अब संशोधन क्यों।

पहली बार घर खरीदने वालों पर सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो पहली बार बैंक ऋण लेकर मकान या फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। फ्लैट की कीमत बढ़ने से डाउन पेमेंट की राशि भी बढ़ेगी, बैंक से अधिक ऋण लेना पड़ेगा और परिणामस्वरूप मासिक किस्त तथा कुल ब्याज का बोझ भी बढ़ जाएगा। यानी मकान खरीदने की कुल लागत पहले की तुलना में काफी अधिक हो जाएगी।

बिल्डर बढ़ी लागत खरीदारों से वसूलेंगे

एडवोकेट मनोज आंकड का कहना है कि निर्माण सामग्री, श्रम और विभिन्न सरकारी शुल्क पहले ही बढ़ चुके हैं। अब डीएलसी दरों में वृद्धि होने के बाद परियोजनाओं की कुल लागत और बढ़ जाएगी। ऐसे में आने वाले समय में लॉन्च होने वाले नए फ्लैट और आवासीय प्रोजेक्ट पहले से अधिक महंगे होने की संभावना है।

ऐसे समझिए आप पर कितना भार

मान लीजिए कोई व्यक्ति 100 वर्गगज का फ्लैट खरीदता है। यदि उस क्षेत्र की डीएलसी दर 6,000 रुपए प्रति वर्गगज है, तो केवल जमीन की सरकारी कीमत ही 6 लाख रुपए मानी जाएगी। इसी आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क तय होता है। दूसरी ओर, सरकार ने भवन निर्माण शुल्क 1200 रुपए से बढ़ाकर 1800 रुपए प्रति वर्गफीट कर दिया है।

यानी प्रत्येक वर्गफीट पर 600 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। यदि 100 वर्गगज (करीब 900 से 1000 वर्गफीट) का फ्लैट बनाया जाता है तो केवल निर्माण शुल्क बढ़ने से बिल्डर की लागत करीब 5.40 से 6 लाख रुपए तक बढ़ जाती है। अतिरिक्त खर्च बिल्डर अपनी ओर से वहन नहीं करेगा, बल्कि फ्लैट की कीमत में जोड़ देगा। इसके बाद डीएलसी बढ़ने से जमीन की सरकारी कीमत बढ़ेगी, जिससे रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और अन्य सरकारी शुल्क भी बढ़ जाएंगे। यानी खरीदार को पहले निर्माण शुल्क बढ़ने का और अब रजिस्ट्री महंगी होने का दोहरा झटका लगेगा।

आम खरीदार पर दोहरा आर्थिक बोझ

भवन निर्माण शुल्क बढ़ने के बाद अब डीएलसी दरों में लगातार संशोधन से आम खरीदार पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। डीएलसी दर बढ़ने का सीधा असर यह होगा कि मकान या फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति को पहले से अधिक राशि खर्च करनी होगी। सबसे अधिक प्रभावित मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वाले परिवार होंगे।
-एडवोकेट अखिलेश जोशी, पूर्व महासचिव, जिला बार एसोसिएशन, जयपुर

Updated on:
15 Jul 2026 07:12 am
Published on:
15 Jul 2026 07:12 am