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IPS Dr. Priti Chandra : राजस्थान पुलिस की ‘लेडी सिंघम’ को अब भरतपुर रेंज की कमान, IG बनने के बाद पहली बार मिली फील्ड पोस्टिंग

Rajasthan में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल। 2008 बैच की तेजतर्रार आईपीएस डॉ. प्रीति चंद्रा बनीं भरतपुर रेंज की नई आईजी, 4 चुनौतीपूर्ण जिलों में संभालेंगी कानून-व्यवस्था।
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IPS Dr Preeti Chandra Appointed New IG Of Bharatpur Range Rajasthan

IPS Dr Priti Chandra - File PIC

राजस्थान में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करने और अपराधियों पर कड़ा शिकंजा कसने के उद्देश्य से भजनलाल शर्मा सरकार ने पुलिस महकमे में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस फेरबदल के तहत 18 वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा में रहने वाली नियुक्ति 2008 बैच की तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रीति चंद्रा (Dr Preeti Chandra) की हुई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) जयपुर में आईजी (कानून एवं व्यवस्था और प्रशासन) के पद पर कार्यरत डॉ. प्रीति चंद्रा को अब भरतपुर रेंज का नया महानिरीक्षक (IG - इंस्पेक्टर जनरल) नियुक्त किया गया है। वे भरतपुर रेंज के निवर्तमान आईजी कैलाश चंद्र बिश्नोई की जगह संभालेंगी, जिन्हें अब जयपुर में आईजी (आयोजना, आधुनिकीकरण और कल्याण) के पद पर भेजा गया है।

डॉ. प्रीति चंद्रा की इस नई फील्ड पोस्टिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली जैसे 4 बेहद संवेदनशील जिलों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की मुख्य कमान संभालेंगी।

डकैतों से लोहा और मानव तस्करी का खात्मा

डॉ. प्रीति चंद्रा को अपराध के प्रति अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति और निडर होकर खुद फ्रंट से फील्ड ऑपरेशन्स को लीड करने के कारण राजस्थान पुलिस में "लेडी सिंघम" और "मर्दानी" के नाम से जाना जाता है। उनके शानदार करियर के कुछ मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं-

चंबल के डकैतों का सरेंडर: करौली जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में तैनात रहने के दौरान उन्होंने खुद चंबल के बीहड़ों में उतरकर खतरनाक सर्च ऑपरेशन्स का नेतृत्व किया। उनकी इस दबंग कार्रवाई के कारण कई लाख रुपये के इनामी कुख्यात डकैतों को पुलिस के सामने घुटने टेकने पड़े।

देह व्यापार के रैकेट को ध्वस्त करना: बूंदी जिले की एसपी रहते हुए उन्होंने देह व्यापार और मानव तस्करी (Human Trafficking) के संगठित नेटवर्क्स पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कई नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू कर उनका उचित पुनर्वास कराया।

बीकानेर में रचा इतिहास: प्रशासनिक इतिहास में वे बीकानेर जैसे बड़े और सीमावर्ती जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) बनीं, जहां उन्होंने बेसिक पुलिसिंग को मजबूत कर अपराध दर में भारी कमी लाई।

भ्रष्टाचार पर कड़ा वार: कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में काम करते हुए उन्होंने घूसखोर अधिकारियों के खिलाफ कई बड़े और सफल ट्रैप (Trap) ऑपरेशन्स को अंजाम दिया।

मुख्यमंत्री पुलिस पदक से हो चुकी हैं सम्मानित

उनकी इस उत्कृष्ट, निडर और बेदाग शासकीय सेवा के लिए उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा प्रतिष्ठित मुख्यमंत्री पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब भरतपुर रेंज की कमान संभालने के बाद उनके सामने मेवात क्षेत्र में पैर पसार चुके संगठित साइबर क्राइम (Cyber Crime), डिजिटल अरेस्ट रैकेट्स और अवैध हथियारों की तस्करी को रोकना सबसे बड़ी और प्राथमिक चुनौती होगी। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि डॉ. प्रीति चंद्रा की सख्त प्रशासनिक कार्यशैली से भरतपुर संभाग के बॉर्डर इलाकों में शांति व्यवस्था और मजबूत होगी।

राजस्थान पुलिस में अब तक क्या-क्या मिली ज़िम्मेदारी?

डॉ. प्रीति चंद्रा (2008 बैच) ने अपने शानदार करियर में राजस्थान पुलिस के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पदों पर काम किया है। अलवर में पहली पोस्टिंग से लेकर आईजी भरतपुर रेंज बनने तक, उनके करियर का सफरनामा इस प्रकार है-

फील्ड पोस्टिंग (ASP और SP स्तर)

एएसपी (ASP), अलवर: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद डॉ. प्रीति चंद्रा की पहली फील्ड पोस्टिंग अलवर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई।

एसपी (SP), बूंदी: पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में यह उनकी बड़ी पोस्टिंग थी। यहां उन्होंने देह व्यापार और मानव तस्करी के नेटवर्क को खत्म कर लड़कियों को रेस्क्यू किया।

एसपी (SP), कोटा एसीबी (Anti-Corruption Bureau): भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्होंने कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एसपी पद की जिम्मेदारी संभाली।

एसपी (SP), करौली: इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने चंबल के बीहड़ों में डकैतों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाए, जिससे उन्हें "लेडी सिंघम" की पहचान मिली।

एसपी (SP), बीकानेर: डॉ. प्रीति चंद्रा को बीकानेर जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) होने का गौरव हासिल है, जहां उन्होंने अपराधियों पर सख्त नकेल कसी।

कमिश्नरेट और विशेष विंग

पुलिस उपायुक्त (DCP), जयपुर मेट्रो कॉर्पोरेशन: उन्होंने जयपुर मेट्रो की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (Additional Commissioner), यातायात एवं प्रशासन, जयपुर: जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में उन्होंने यातायात प्रबंधन और पुलिस प्रशासन को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया।

ट्रेनिंग डिवीजन, पुलिस मुख्यालय (PHQ): प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए मुख्यालय के प्रशिक्षण प्रभाग में भी जिम्मेदारी दी गई थी।

वरिष्ठ स्तर की पोस्टिंग (DIG और IG रैंक)

डीआईजी (DIG), आर्म्ड बटालियन-I, जयपुर: प्रमोशन मिलने के बाद उन्होंने जयपुर में आर्म्ड बटालियन के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) के पद पर सेवाएं दीं।

आईजी (IG), कानून एवं व्यवस्था (Law and Order) और प्रशासन, जयपुर: साल 2026 की शुरुआत में उन्हें पुलिस मुख्यालय, जयपुर में आईजी (कानून एवं व्यवस्था) के रूप में मुख्यधारा की बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई।

आईजी (IG), भरतपुर रेंज (वर्तमान पद): राज्य सरकार के नवीनतम आदेश के तहत वे अब भरतपुर रेंज के महानिरीक्षक (IG) का पद संभाल रही हैं, जहां वे भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली जिलों की कमान संभालेंगी।

सीकर के कुंदन गांव से आईजी की कुर्सी तक

डॉ. प्रीति चंद्रा की यह सफलता कहानी राजस्थान के ग्रामीण परिवेश से जुड़े युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उनका जन्म 1979 में सीकर (Sikar) जिले के एक बेहद साधारण से गांव कुंदन में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र सुंडा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक और एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बेटी की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

डॉ. प्रीति ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा गांव के ही एक स्थानीय सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित महारानी कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन (M.A.), एम.फिल. (M.Phil.) और बी.एड. (B.Ed.) की डिग्रियां हासिल कीं। उनका वैवाहिक जीवन भी प्रशासनिक सेवा से जुड़ा है, उनके पति डॉ. विकास पाठक भी एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं।

'खाकी' पहनने से पहले स्कूल टीचर और पत्रकार

आईपीएस अधिकारी के रूप में अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाली डॉ. प्रीति चंद्रा का सिविल सर्विसेज में आने से पहले का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय तक एक स्कूल में शिक्षिका के तौर पर बच्चों को पढ़ाती थीं। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया जगत में भी हाथ आजमाया और एक रीजनल न्यूज चैनल में बतौर स्थानीय पत्रकार काम करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग की।

हालांकि, उनका असली लक्ष्य समाज में एक बड़ा बदलाव लाना था, जिसके लिए उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद लिए, पूरी तरह सेल्फ-स्टडी के दम पर अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया 255वीं रैंक हासिल कर राजस्थान कैडर की आईपीएस अधिकारी के रूप में अपना सफर शुरू किया।