यपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ मवारामगढ़ क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने लगी है।
Jaipur Rural Development Projects : बस्सी (जयपुर)। जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ मवारामगढ़ क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने लगी है। विपक्ष का आरोप है कि पिछली सरकार में स्वीकृत कई परियोजनाओं पर काम रुक गया है, जबकि वर्तमान सरकार की बजट घोषणाओं का भी जमीनी असर दिखाई नहीं दे रहा।
जगतपुरा से बस्सी तक प्रस्तावित 600 फीट चौड़ी सेक्टर रोड को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा था। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान भूमि चिह्नीकरण और डिमार्केशन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सड़क बनने से जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दबाव कम हो सकता था।
पूर्व सरकार ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम करने के लिए शहर की विभिन्न दिशाओं में ट्रोमा अस्पताल स्थापित करने की योजना बनाई थी। आगरा रोड (कानोता), दिल्ली रोड, टोंक रोड और अजमेर रोड पर अस्पतालों के लिए 25-25 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि आगरा रोड और दिल्ली रोड स्थित अस्पतालों का निर्माण रोक दिया गया, जबकि अन्य स्थानों पर कार्य आगे बढ़ा।
बस्सी में प्रस्तावित वेटेनरी कॉलेज का निर्माण शुरू नहीं होने से पशुपालन क्षेत्र से जुड़े लोगों में निराशा है। इसके अलावा बांसखोह पुलिस चौकी भवन निर्माण कार्य भी लंबित है, जिससे सुरक्षा व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण तूंगा रीको क्षेत्र का कार्य भी अधूरा पड़ा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने पर युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते थे। विधायक लक्ष्मण मीना ने कहा कि पूर्व सरकार की घोषणाओं पर वर्तमान सरकार ने 'स्थायी ब्रेक' लगा दिए हैं और बजट में घोषित कई कार्य भी पूरे नहीं कराए जा रहे हैं।
कानोता क्षेत्र में स्वीकृत बस स्टैंड निर्माण और कॉलेज भवन निर्माण कार्य भी अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं यात्रियों को भी पर्याप्त सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है।