
पत्रिका स्टिंग का फोटो
Illegal Activity In Jaipur: गुलाबी नगरी जयपुर के कई प्रमुख और व्यस्त इलाकों में अब रात ही नहीं बल्कि दिन के उजाले में भी खुलेआम जिस्म के सौदे हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रिहायशी कॉलोनियों से लेकर VIP इलाकों तक फैला यह संगठित नेटवर्क न केवल कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहा है बल्कि महिलाओं के शोषण और जघन्य अपराधों को भी बढ़ावा दे रहा है। 'पत्रिका' टीम ने दो दिनों तक शहर के विभिन्न हिस्सों में पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
पड़ताल में सामने आया कि लक्ष्मी मंदिर चौराहा, जयपुर जंक्शन, सी-स्कीम और सिंधी कैंप जैसे इलाकों में ये जाल पूरी तरह पैर पसार चुका है। दलाल ग्राहकों को शुरुआती बातचीत के तुरंत बाद अपनी सुरक्षित जगहों पर चलने का दबाव बनाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस अनैतिक गतिविधि के कारण अब शाम के समय परिवारों का घरों से निकलना भी दूभर हो गया है।
दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र, बीटू बायपास से न्यू सांगानेर रोड लेन, 200 फीट बायपास, स्टैच्यू सर्कल, मालवीय नगर, जगतपुरा, लालकोठी, सीतापुरा और मानसरोवर में वरुण पथ थाने के पास भी इसी तरह के हालात बने हुए हैं।
स्टिंग के दौरान सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि इनमें कानून का कोई डर नहीं है। जब रिपोर्टर ने दलालों और महिला एजेंटों से पुलिस कार्रवाई का डर जताया, तो उनका बेबाक जवाब था- 'पुलिस कुछ नहीं करेगी साहब। ग्राहक फंसाने के लिए वे बिना आइडी कार्ड के होटलों में कमरा दिलाने का लालच देते हैं और पुलिस से 'सेटिंग' का दावा करते हैं।
रिपोर्टरः कोई मिलेगी क्या?
महिलाः हां, मिल जाएगी। खर्च 700 से 900 रुपए लगेगा। जाने की व्यवस्था ऑटो से रहेगी।
रिपोर्टरः जगह कौन सी होगी?
दलालः कुछ ही दूरी पर एसी कमरा मिल जाएगा। उसका किराया अलग से देना पड़ेगा।
रिपोर्टरः पुलिस या कोई और परेशानी तो नहीं होगी?
महिलाः कुछ नहीं होगा। वहां ड्रिंक भी मिल जाएगी और चॉइस भी। बस तुम पैसे सही दे देना।
रिपोर्टरः कितना पैसा लगेगा?
महिलाः (एल्बम दिखाते हुए) 1000 रुपए। जगह की कोई टेंशन नहीं है।
रिपोर्टरः हजार रुपए में कमरा भी शामिल है? पुलिस तो नहीं आएगी?
दलाल: (बीच में हंसते हुए) पुलिस की कोई माथापच्ची नहीं है। हमारे बंदे वहां रहते हैं।
रिपोर्टरः स्टेशन पर तो हर वक्त भारी पुलिस रहती है?
महिलाः (हंसते हुए) अरे साहब! पुलिस से डरते तो यह काम कैसे करते? तुम चलो तो सही, सब सुरक्षित है।
रिपोर्टरः रात गुजारनी है, तीन दोस्त बाहर से आए हैं?
महिला एजेंटः हां, क्यों नहीं। होटल भी पास ही है। 1500 से 2500 रुपए तक का पैकेज है। इसमें बढ़िया एसी कमरा, ड्रिंक और सब कुछ साथ मिलेगा।
रिपोर्टरः इतना महंगा क्यों?
महिला एजेंटः यह सिंधी कैंप है भाईसाहब। यहां के होटलों की
सेटिंग पक्की होती है। तुम्हें कोई आइडी कार्ड भी नहीं देना पड़ेगा। 2500 दो और बिल्कुल बेफिक्र होकर ऐश करो, कोई परेशान नहीं करेगा।
रिपोर्टरः कोई खतरा तो नहीं है ना?
महिला एजेंटः एक बार अंदर चले गए तो बाहर क्या हो रहा है, तुम्हें पता भी नहीं चलेगा। पूरी जिम्मेदारी हमारी है।
इन मामलों में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती ठोस साक्ष्य जुटाने की होती है। अधिकांश मामलों में कोई प्रत्यक्ष शिकायतकर्ता सामने नहीं आता जिससे कानूनी कार्रवाई कठिन हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति को ऐसी गतिविधियों की जानकारी मिले तो वह
तत्काल पुलिस को सूचना दे ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) भी इस धंधे में फंसी महिलाओं के पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास के लिए काम कर रहे हैं जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
जयपुर में ये कारोबार तेजी से फैल रहा है और इस पर प्रभावी अंकुश के लिए पुख्ता सबूत जरूरी हैं। कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
अनिल गोठवाल, रिटायर्ड अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
Updated on:
24 Jul 2026 01:14 pm
Published on:
24 Jul 2026 12:51 pm
