मानसरोवर के विजय पथ पर तेज रफ्तार SUV ने स्कूटी सवार महिला को करीब 25 फीट तक घसीट दिया। हादसे में महिला गंभीर घायल होकर वेंटिलेटर पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि चालक पर पहले से ओवरस्पीड के तीन चालान थे, फिर भी न परिवहन विभाग ने लाइसेंस निरस्त किया और न पुलिस ने कोई सख्त कदम उठाया।
जयपुर: शहर की सड़कों पर एसयूवी के नाम पर बेलगाम दौड़ते वाहन अब लोगों के लिए खौफ का कारण बनते जा रहे हैं। मानसरोवर के विजय पथ स्थित एसबीआई बैंक के सामने मंगलवार सुबह तेज रफ्तार एसयूवी ने स्कूटी सवार महिला को टक्कर मारकर करीब 25 फीट तक घसीट लिया।
इस दिल दहला देने वाले हादसे में गंभीर रूप से घायल महिला निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें एसयूवी की बेकाबू रफ्तार और चालक की लापरवाही साफ नजर आ रही है। हादसे के बाद चालक फरार हो गया।
पुलिस के अनुसार, विजय पथ निवासी नेहा श्रीवास्तव (35) मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे स्कूटी से बाजार जा रही थीं। एसबीआई बैंक के सामने कट से टर्न लेते समय तेज रफ्तार एसयूवी ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। नेहा स्कूटी सहित एसयूवी के आगे बोनट में फंस गई और वाहन उन्हें सड़क पर करीब 25 फीट तक घसीटता ले गया।
हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। घायल नेहा को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। उनके पति अंकित सक्सेना पीएचईडी में यूडीसी पद पर कार्यरत हैं।
नेहा के देवर अर्पित सक्सेना हादसे के समय पत्नी ज्योत्सना के साथ पीछे दूसरे वाहन पर थे। अर्पित ने बताया कि उन्होंने एसयूवी के आगे के शीशे पर हाथ मारा, तब चालक बाहर निकला। नेहा भाभी गाड़ी के बोनट के आगे बुरी तरह फंसी हुई थीं।
चालक ने नीचे झुककर देखा, लेकिन मदद करने के बजाय फरार हो गया। एसयूवी पर वर्ष 2026 में पहले से तेज रफ्तार के तीन चालान दर्ज हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग ने अब तक लाइसेंस निरस्त नहीं किया, न ही संबंधित पुलिस निरीक्षक ने कोई कार्रवाई की।
वर्तमान में केवल शराब पीकर वाहन चलाने से हुई मृत्यु को ही 'गैर-इरादतन हत्या' की श्रेणी में माना जाता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में सजा के प्रावधानों को और सख्त बनाने की आवश्यकता जता चुका है।
ऐसी लापरवाही को 'मानवीय जीवन को खतरे में डालने' और 'गैर-इरादतन हत्या' के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि आरोपी में कानून का भय बना रहे और उसे तुरंत जमानत का लाभ न मिल सके।
-मोहित खंडेलवाल, अधिवक्ता, राजस्थान हाईकोर्ट