- 2013 में हुई थी शुरुआत, 70 करोड़ से ज्यादा यूजर - अमरीका, यूरोप और एशिया पैसेफिक में 35 डेटा सेंटर कर चुका है स्थापित
जयपुर. टियर टु सिटीज के स्टार्टअप सिनेरियो में पिंकसिटी उभरता हुआ नाम है। यहां का यंग टैलेंट दुनियाभर में अपनी धाक जमा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज पांच साल में ही पिंकसिटी के एक स्टार्टअप ने बड़ा मुकाम हासिल किया है। शहर का यह स्टार्टअप दुनियाभर की डेढ़ लाख वेबसाइट्स का लॉग इन हैंडल कर चुका है। इसके 70 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं और अमरीका, यूरोप और एशिया पैसेफिक में ३५ डेटा सेंटर स्थापित कर चुका है। पिछले साल स्टार्टअप को माइक्रोसॉफ्ट और फोर्जपॉइंट कैपिटल से १७ मिलियन यूएस डॉलर की फंडिंग हो चुकी है। स्टार्टअप लगभग तीन हजार जानी मानी कंपनियों के लॉग इन हैंडल करता है।
खुद के स्टार्टअप से निकला आइडिया
मिडिल क्लास फैमिली में जन्मे लॉगइन रेडियस के फाउंडर राकेश सोनी ने बताया कि इसे स्कूल फ्रैंड दीपक गुप्ता के साथ शुरू किया था। इसका आइडिया खुद के ही दो स्टार्टअप से आया। जब वेबसाइट में बिल्ट इन लॉग इंस में सिक्योरिटी, प्राइवेसी और समस्या आने लगी, तो सोचा कि यह बिग बिजनेस आइडिया हो सकता है। इसके बाद कुछ समय में ही डेढ़ लाख वेबसाइट्स का लॉग इन हैंडल करने लगे, लेकिन बड़ी कंपनियों को टार्गेट करने के लिए हमने अपनी स्ट्रेटेजी चेंज करना शुरू कर दिया। शुरू में बड़ी कंपनियों ने अपने यूजर की सिक्योरिटी को लेकर ट्रस्ट नहीं किया, लेकिन बड़ी कंपनियों के लिए जब दुनियाभर में लॉगइन सर्विसेज देना शुरू किया तो बड़ी कंपनियों ने हम पर भरोसा करना शुरू किया। देखते ही देखते तीन हजार कंपनियां हमारी क्लाइंट बन गईं। हम माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे थे, एेसे में इसने हम पर भरोसा किया और हमें इतनी बड़ी फंडिंग ऑफर कर दी।
हैवी लोड लेने के लिए बनाया सर्वर
राकेश ने बताया कि हमारे सॉफ्टवेयर्स की खासियत यह है कि इसमें यूजर एक्सपीरियंस एडवांस और मॉर्डन है। दूसरा, यूजर अकाउंट डेटा सिक्योरिटी रिस्क बेस्ड ऑथेंटिकेशन पर आधारित है। टू फेक्टर ऑथेंटिकेशन के जरिए यूजर यदि किसी दूसरी जगह से लॉग इन करता है या अकाउंट पर कोई अनयूजुअल एक्टिविटी होती है, तो यह तुरंत इसे पकड़ लेता है और यूजर को इंफॉर्म करता है। वहीं प्राइवेसी प्रोटेक्शन के लिए यूजर को यह पावर दी जाती है कि उनका डेटा बिना मर्जी के कोई भी इस्तेमाल नहीं कर सके। राकेश ने कहा कि शुरू में सिस्टम में हमने यह रियलाइज किया कि सर्वर लोड हैंडल नहीं कर पा रहा था, लेकिन फिर हमने इसकी ऑटो स्केलिंग की। जिसके जरिए यह लोड को आइडेंटिफाई कर सर्वर को एक्सपेंड कर देता है। यह सर्वर की 35 प्रतिशत कैपेसिटी होने पर एडिशनल स्टोरेज लेना शुरू कर देता है। इससे सर्वर पर हैवी लोड होने पर भी वेबसाइट का लॉगइन ब्रेक या क्रैक नहीं होता।
बड़ा सपना देखा, फिर उसे पूरा किया
'मिडिल क्लास एक बड़ा ख्वाब देख सकता है... को मेंशन करते हुए राकेश कहते हैं कि मैंने हमेशा बड़ा सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए पूरे डेडिकेशन के साथ मेहनत की। यदि स्टार्टअप एडेप्टेबल है, रोजाना खुद को इवॉल्व कर रहा है, तो उसे आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। शुरू में हमें भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हमने दुनिया को वो सर्वर दिया, जिसे आज हर कोई अपनाना चा