जयपुर

जयपुर में यहां बनेगा 37KM लंबा एलिवेटेड रोड, 7 जगहों से जुड़ेगी शहर की प्रमुख सड़कें, 6000 करोड़ आएगी लागत

Jaipur Elevated Road: जयपुर में यातायात की तस्वीर बदलने के लिए द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में प्रस्तावित 37 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड की योजना आगे बढ़ी है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड बनाने की संभावना जताई गई है।
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Updated: 27 Oct 2026, 8:03 AM IST
Dravyavati River Elevated Road
द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में प्रस्तावित 37 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड। फोटो: पत्रिका

जयपुर। जयपुर में यातायात की तस्वीर बदलने के लिए द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में प्रस्तावित 37 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड की योजना आगे बढ़ी है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड बनाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, जेडीए को अभी रिपोर्ट मिलनी बाकी है। 15 नवंबर तक रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ बैठक में तय होगा कि करीब 6000 करोड़ रुपए की इस परियोजना को एक साथ बनाया जाए या चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

जेडीए के प्रस्ताव के अनुसार, एलिवेटेड रोड स्वर्ण जयंती गार्डन, विद्याधर नगर से शुरू होकर गोनेर के आगे रिंग रोड तक ले जाने की योजना है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती केवल इतनी लंबी सड़क बनाना नहीं, बल्कि इसे जयपुर शहर के प्रमुख मार्गों से जोड़ना भी है। इसके लिए तकनीकी व्यवहार्यता, मेट्रो ट्रैक और हाईटेंशन बिजली लाइनों के साथ तालमेल बैठाना होगा।

दो विकल्पों में तय होगा रोड का स्वरूप

पहले विकल्प में एलिवेटेड रोड को सात स्थानों पर लेग के जरिए नीचे के प्रमुख मार्गों से जोड़ने की योजना है। प्रस्ताव में सीकर रोड, अजमेर रोड, न्यू आतिश मार्केट, रिद्धि-सिद्धि हाईलेवल ब्रिज, बी-टू बाइपास, सांगा सेतु और बम्बाला पुलिया सहित रिंग रोड तक कनेक्टिविटी का जिक्र है। इससे अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को कॉरिडोर से जुड़ने का रास्ता मिल सकेगा।

दूसरे विकल्प में इसे एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर विकसित करने और नीचे प्रमुख मार्गों से जोड़ने के लिए लेग बनाने पर विचार है। न्यू आतिश मार्केट में मेट्रो ट्रैक के ऊपर से एलिवेटेड रोड निकालने का विकल्प भी रिपोर्ट में बताया गया है। इस हिस्से में सड़क की ऊंचाई जमीन से करीब 22 से 25 मीटर तक रहने का अनुमान है। ऐसे में मेट्रो संरचना, हाईटेंशन लाइनों और निर्माण के लिए जरूरी जगह की तकनीकी जांच अहम होगी।

लागत और कनेक्टिविटी पर बड़ा फैसला

करीब 6000 करोड़ रुपए की लागत और 37 किलोमीटर की लंबाई वाली यह परियोजना शहर के कई हिस्सों को जोड़ने की क्षमता रखती है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि लेग कहां उतरेंगे, प्रमुख चौराहों पर यातायात कैसे जुड़ेगा और निर्माण के दौरान मौजूदा यातायात को किस तरह संभाला जाएगा। मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक में परियोजना के स्वरूप, चरणबद्ध निर्माण और आगे की प्रक्रिया पर फैसला होने की उम्मीद है।

खास-खास

-6000 करोड़ रुपए खर्च होंगे इस परियोजना पर
-37 किमी कुल लंबाई बताई गई है रिपोर्ट में एलिवेटेड रोड की
-सिंगल पिलर तकनीक पर इसे बनाने का दिया गया है प्रस्ताव

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27 Oct 2026, 8:03 AM IST
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