
जयपुर. नगर निगम चुनाव में आरक्षण के तहत महिलाओं को टिकट मिला, जनता ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें चुनकर पार्षद की कुर्सी तक पहुंचाया। अब इन महिला पार्षदों के सामने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने की चुनौती है। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 52 महिला पार्षद चुनी गई हैं। इनसे उम्मीद है कि वे अपने वार्ड की समस्याओं को समझेंगी, जनता की आवाज उठाएंगी और स्थानीय सरकार के फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। लेकिन नए बोर्ड की शुरुआती बैठकों में जिस तरह महिला पार्षदों के साथ उनके पति, बेटे और अन्य रिश्तेदार नजर आ रहे हैं, उसने महिला प्रतिनिधित्व और वास्तविक नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि क्या महिला पार्षद अपने पद की जिम्मेदारी खुद संभालते हुए स्वतंत्र रूप से फैसले ले पाएंगी और नगर निगम की कार्यप्रणाली में अपनी अलग पहचान बना सकेंगी? या फिर उनकी जगह परिवार के सदस्य ही बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय रहेंगे? महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल महिलाओं को चुनाव लड़ने और निर्वाचित होने का अवसर देना नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का पूरा मौका देना भी है। ऐसे में महिला पार्षदों की सक्रियता, अधिकारियों के साथ उनका सीधा संवाद और वार्ड से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
पिछले बोर्ड के कार्यकाल पर नजर डालें तो ग्रेटर और हैरिटेज नगर निगम में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला था। कई महिला पार्षदों ने विभिन्न जिम्मेदारियां भी संभालीं, लेकिन वार्ड की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने, अधिकारियों से सीधे बातचीत करने और विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में सक्रिय भागीदारी निभाने के मामले में महिला पार्षदों की संख्या सीमित रही। ऐसे में नए बोर्ड में चुनी गई महिला पार्षदों के सामने अपने वार्ड की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के साथ-साथ महिला नेतृत्व को मजबूत पहचान दिलाने की भी जिम्मेदारी है।
महापौर सुनील कोठारी की बैठक में पार्षदों के पति और रिश्तेदारों की मौजूदगी पर सख्ती के बाद यह बहस और महत्वपूर्ण हो गई है। राजनीति से जुड़े जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का मकसद केवल महिलाओं को चुनाव लड़ने और निर्वाचित होने का अवसर देना नहीं, प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना बल्कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी भी है।
पिछले बोर्ड में ग्रेटर नगर निगम के 150 वार्डों में 53 और हैरिटेज नगर निगम के 100 वार्डों में 37 महिला पार्षद थीं। इसके बावजूद सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिलाओं का दायरा सीमित रहा। बमुश्किल 10 प्रतिशत महिला पार्षद ही सक्रिय रूप से सामने आईं। ज्यादातर महिला पार्षद केवल बोर्ड बैठकों में ही नजर आती थीं।
पिछले बोर्ड में ग्रेटर नगर निगम में शील धाभाई, राखी राठौड़, दुर्गेश नंदिनी, भारती लख्यानी, मीनाक्षी शर्मा, अर्चना शर्मा, रश्मि सैनी और सुखप्रीत बंसल ने चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। वहीं, हैरिटेज नगर निगम में संतोष कंवर, अंशू शर्मा, पूनम शर्मा, ज्योति चौहान, बबीता तंवर और रितु मोटियानी चेयरमैन बनीं। हालांकि, इस बार इनमें से कोई भी दोनों नगर निगमों में पार्षद नहीं है।