जयपुर

पाकिस्तान की नई साजिश? जयपुर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी महिला गिरफ्तार, हरियाणा की यूट्यूबर भी जांच के घेरे में

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क अब महिलाओं के जरिए सोशल मीडिया और भावनात्मक रिश्तों का इस्तेमाल कर भारत में स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। जयपुर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी एक महिला की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा की एक यूट्यूबर समेत कुछ अन्य लोगों के कथित संबंध भी जांच के दायरे में हैं।
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Aug 03, 2026
Crime News
अर्पिता और बबिता की फोटो: पत्रिका

Pakistan Spy Network: पाकिस्तान समर्थित आतंकी और जासूसी नेटवर्क ने भारत के खिलाफ अपनी रणनीति में खतरनाक बदलाव किया है। पहले जहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और उसकी महिला एजेंट मुख्य रूप से पुरुषों को फंसाकर सामरिक सूचनाएं जुटाती थीं वहीं अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने ऐसे संकेत मिले हैं कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन महिलाओं को जोड़कर 'स्लीपर सेल' तैयार कर रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सोशल मीडिया, भावनात्मक रिश्ते, धार्मिक प्रभाव और ऑनलाइन संपर्क इनके नए हथियार बन चुके हैं, जिनका मकसद भारत में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देना है। एजेंसियां अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी नंबरों से संपर्क और डिजिटल बातचीत पर विशेष निगरानी रख रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठन अपनी पहचान छिपाने और सुरक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हाल की गिरफ्तारियों ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

बीते दो महीनों में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी दो महिलाओं की गिरफ्तारी ने इस बदलते ट्रेंड को उजागर किया है:

बबीता (जयपुर): राजस्थान एटीएस ने जून 2026 में जयपुर निवासी बबीता को गिरफ्तार किया। राजस्थान में इस तरह के मामले में किसी महिला की यह पहली गिरफ्तारी है। उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कार्रवाई की गई है और उसके डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।

अर्पिता सरकार (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने जैश से जुड़े संदिग्ध मोहम्मद हमीम मंडल की सहयोगी अर्पिता सरकार को दबोचा।

अन्य मामले: यूपी की मीरा और हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति का नाम भी पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क और संचालकों से कथित संबंधों को लेकर जांच के दायरे में है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकी संगठनों की यह रणनीति जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही है। पहले जहां ऐसे नेटवर्क में सीमित लोगों को शामिल किया जाता था, वहीं अब ऑनलाइन माध्यमों से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है।

फेक ID से दोस्ती और भावनात्मक जाल

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तानी नेटवर्क अब केवल जासूसी तक सीमित नहीं है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और वाट्सऐप पर फर्जी पहचान बनाकर पहले महिलाओं से दोस्ती की जाती है। इसके बाद भावनात्मक जाल में फंसाकर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने और संवेदनशील सूचनाएं जुटाने का प्रयास किया जाता है।

Updated on:
03 Aug 2026 11:42 am
Published on:
03 Aug 2026 11:42 am