मानसागर (जलमहल) झील के किनारे पयर्टकों को लुभाने के लिए चौपाटी जैसा प्लेटफॉर्म बनाया गया, लेकिन समय के साथ यह चौपट हो गया। जेडीए ने इसे बनाने में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन रखरखाव नहीं किया गया। इतना ही नहीं, विकास के दौरान जेडीए ने हरियाली का भी ध्यान नहीं रखा। झील किनारे का […]
मानसागर (जलमहल) झील के किनारे पयर्टकों को लुभाने के लिए चौपाटी जैसा प्लेटफॉर्म बनाया गया, लेकिन समय के साथ यह चौपट हो गया। जेडीए ने इसे बनाने में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन रखरखाव नहीं किया गया। इतना ही नहीं, विकास के दौरान जेडीए ने हरियाली का भी ध्यान नहीं रखा। झील किनारे का एक बड़ा हिस्सा बिना पेड़ के नजर आता है। यही वजह है कि जैसे ही सूरज चढ़ता है तो झील किनारे लोग दिखना बंद हो जाते हैं। हालांकि, सुबह-शाम पर्यटकों की आवाजाही होती है। दरअसल, मानसागर और उसके भराव क्षेत्र की जमीन को लीज पर देने से पहले जेडीए ने आमेर रोड के सहारे झील के एक हिस्से को पयर्टन स्थल के रूप में विकसित किया था।
सजावटी पौधे गायब
प्लेटफॉर्म विकसित करने के बाद सजावटी पौधे लगाए गए। ये पौधे अब गायब हो चुके हैं। पूरे प्लेटफॉर्म पर पेड़ न होने की वजह से लाल पत्थर तपता है। ऐसे में कोई भी सैलानी दिन में नजर नहीं आता है।
फाउंटेन बंद, उखड़ रहे पत्थर
-पत्थर के फाउंटेन भी नहीं चल रहे। जो लोहे व अन्य धातु के फाउंटेन थे, वे चोरी हो चुके हैं।
-झील और प्लेटफॉर्म के बीच में लगाईं जालियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
-कई जगह फर्श तक उखड़ गया है। दीवार पर लगाए गए पत्थर तक गिरने लगे हैं।
-खूबसूरती के लिए लगाए पत्थर के कई पिलर गायब हो चुके हैं और कई टूट चुके हैं।
-हैरिटेज लुक की लाइटें लगाई गईं थीं। इनके कहीं पोल गायब हैं तो कहीं लाइट ही नजर नहीं आती।
किनारों पर कचरा ही कचरा
झील के किनारे पर लोग सुबह-शाम बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इनमें से कई लोग जाली पार करके पानी तक चले जाते हैं। यहां कचरा भी फेंक देते हैं। बरसात के दिनों में नालों से भी कचरा झील में आता है। झील के किनारे कचरा एकत्र हो गया है।