
Jaswant Singh Birth Anniversary Special: पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह की जयंती 3 जनवरी यानी आज मनाई जा रही है। जसवंत सिंह भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने अपने अनुशासन, राष्ट्रवाद और बेबाक विचारों से अलग पहचान बनाई। राजनीति में एंट्री से पहले उन्होंने भारतीय सेना में भी सेवाएं दी थी।
जसवंत सिंह का जन्म 3 जनवरी 1938 को बाड़मेर जिले के जसोल गांव में हुआ था। उनके पिता ठाकुर सरदार सिंह राठौड़ थे और माता कुंवर बाईसा थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद जसवंत सिंह मात्र 15 साल की उम्र में ही भारतीय सेना में भर्ती हुए और करीब 10 साल तक सेना में रहे। जसवंत सिंह ने 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कहने पर राजनीति में एंट्री की। वे वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री और वित्त मंत्री भी रहे थे।
1. 15 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से शिक्षा पूरी करने के बाद जसवंत सिंह 15 साल की उम्र में 1957 में भारतीय सेना में भर्ती हुए और 1966 तक सेना में रहे। उन्होने 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया। हालांकि, साल 1966 में वे भारतीय सेना से रिटायर्ड हो गए थे। इसके बाद वे जोधपुर के महाराज गज सिंह के सलाहकार बन गए।
2. भैरों सिंह शेखावत के कहने पर राजनीति में एंट्री: जसवंत सिंह ने साल 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कहने पर राजनीति में एंट्री की। भैरों सिंह शेखावत के करीबी जसवंत सिंह ने राजनीति की शुरुआत भारतीय जनसंघ से की। 1980 में भाजपा के गठन के समय तक वे अग्रणी भूमिका में आ चुके थे। शेखावत के कहने पर 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा।
3. पहली बार 1996 वित्त मंत्री बने: जसवंत सिंह 16 मई 1996 से 1 जून 1996 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे। वे 5 दिसंबर 1998 से 1 जुलाई 2002 तक वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे। 2002 में वे एक बार फिर वित्त मंत्री बने और इस पद पर मई 2004 तक रहे। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने बाजार-हितकारी सुधारों को बढ़ावा दिया। उन्हें साल 2001 के लिए उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। 2004 से 2009 तक वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे।
4. जसवंत सिंह को 2009 में पार्टी से निकाला: जसवंत सिंह अपनी किताब ‘जिन्ना: इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस’ को लेकर विवादों में रहे। किताब में मुहम्मद अली जिन्ना की तारीफ के कारण भाजपा ने उन्हें 19 अगस्त 2009 को पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि, साल 2010 में जसवंत की फिर से भाजपा में वापसी हुई। साल 2012 में भाजपा ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। लेकिन, यूपीए के हामिद अंसारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
5. 2014 में भाजपा छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ा: साल 2014 में जसवंत सिंह को भाजपा ने लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया था। बाड़मेर सीट से कर्नल सोनाराम चौधरी को चुनावी मैदान में उतारने के बाद जसवंत सिंह ने भाजपा छोड़ दी और निर्दलीय चुनावी रण में उतरे थे। हालांकि, हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वे दिल्ली लौट गए और 8 अगस्त की रात को दिल्ली में अपने आवास में फर्श पर गिरने के बाद से वे कोमा में चले गए। कोमा में जाने के बाद वो कभी-कभी आंख खोलते थे लेकिन बोल नहीं पाते थे। 6 साल तक कोमा में रहे और 27 सितंबर 2020 को उनका निधन हो गया था।