जयपुर

जदयू की साख और सम्राट की अग्निपरीक्षा

सम्राट के सहारे नीतीश कुमार अपने कोर वोटरों को यह सीधा संदेश दे गए कि सत्ता अपने परिवार में ट्रांसफर करने की बजाय अपनी कोर विराजती को सौंप रहे हैं।
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Apr 17, 2026
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प्रियरंजन भारती वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार - सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार के 24वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्य में पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है। हालांकि पार्टी और आरएसएस के स्तर पर सम्राट चौधरी का विरोध होता रहा। संभवत: आखिर तक मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस का वातावरण इसीलिए बनाए रखा गया। लेकिन नीतीश कुमार ने बीजेपी और जदयू नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक में साफ बता दिया था कि सम्राट चौधरी के अलावा कोई दूसरा कतई मंजूर नहीं होगा। सम्राट के सहारे नीतीश कुमार अपने कोर वोटरों को यह सीधा संदेश दे गए कि सत्ता अपने परिवार में ट्रांसफर करने की बजाय अपनी कोर विराजती को सौंप रहे हैं।

नीतीश कुमार ने 5 मार्च को ही राज्यसभा जाने का निर्णय कर लिया था। तभी तय हो गया कि सम्राट ही उनके उत्तराधिकारी होंगे पर मूल भाजपाई इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। इसके लिए दिल्ली-पटना तक खूब लॉबिंग हुई। लेकिन स्टेट लीडरशिप को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगे सरेंडर करना पड़ गया। आरएसएस चाहता रहा कि पहला सीएम अपना स्वयंसेवक बने। संघ की तरफ से ईसीसी लीडर को सीएम बनाने का प्लान दिया गया। इस निमित्त विधायक संजीव चौरसिया आगे किए गए और पार्टी नेतृत्व के साथ मीटिंग भी हुई। लेकिन संघ के एक धड़े ने मोर्चा संभाला और सम्राट के नाम को आगे किया।

संघ की तरफ से सम्राट को लेकर दो अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आखिरकार दबाव बनाया। बीजेपी का असली टार्गेट यूपी विधानसभा चुनाव है। सम्राट के जरिए यूपी को मैसेज देने की कोशिश हुई है। अखिलेश यादव के पीडीए की काट में सम्राट के जरिए संदेश दिया गया। यूपी में यादव से ज्यादा कुर्मी विधायक हैं। दरअसल अखिलेश यादव मुस्लिम और यादव के अलावा गैर यादव ओबीसी को साधने का लक्ष्य बनाकर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भरोसा सम्राट चौधरी ने बखूबी जीता है। हर दिए गए टास्क को पूरा किया। 2022 में जब नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़ महागठबंधन का दामन थामा तो सम्राट ने नीतीश को हटाने के संकल्प के साथ मुरेठा बांधा। फिर नीतीश के बीजेपी के साथ आ जाने पर 2024 में अयोध्या में सरयू स्नान कर मुरेठा भगवान राम को समर्पित करते हुए मुंडन करवाया।

वह कहते चले कि हमारा कमिटमेंट पार्टी के प्रति रहा है। फिर जब नीतीश के नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी तो नीतीश के साए की तरह हमेशा सरकार में नंबर दो की हैसियत के साथ काम किया और मुख्यमंत्री का भरोसा जीतने में कामयाब हुए। नीतीश कुमार ने 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली दफा गृह विभाग छोड़ा और सम्राट को सौंप दिया। इसके अलावा पार्टी संगठन को मजबूती दी तथा एक एग्रेसिव नेता के रूप में अपनी छवि बना ली। नीतीश कुमार ने बेशक सम्राट को मुख्यमंत्री बनवाकर कथित तौर पर अपने डमी बीजेपी नेता को सत्ता सौंपी हो और यह संतोष कर लिया हो कि सरकार उनके नक्शे-कदम पर चलेगी, लेकिन सम्राट की अग्निपरीक्षा यहीं से शुरू होती है। वह पार्टी के वफादार साबित होते हैं या नीतीश कुमार के भरोसेमंद, यह सबसे बड़ा यक्षप्रश्न होगा।

नीतीश के विस्मृति के दौर में यह और भी व्यापक आधार पर आ खड़ा हुआ है। बीजेपी के लिए अपना जनाधार बढ़ाने और नीतीश के मुरीद वोटबैंक को अपने साथ जोड़ लेने के अलावा बिहार में दो धु्रवों की सत्ता राजनीति की जमीन तैयार करना मोदी-शाह का बड़ा लक्ष्य है। यह देखना होगा कि सम्राट चौधरी पार्टी के अंतर्विरोधों को दबाते हुए कैसे वफादार साबित हो पाते हैं और इस टारगेट को पूरा कर सकने में कामयाब होते हैं।

Updated on:
17 Apr 2026 02:57 pm
Published on:
17 Apr 2026 02:57 pm