जयपुर

Rajasthan Farmers : कम लागत में बंपर उपज का फार्मूला है ‘जीवामृत’, जानें कैसे बदल जाएगी राजस्थान के किसानों की किस्मत

Rajasthan Farmers : जीवामृत कम लागत में बंपर उपज का फार्मूला है। इस जीवामृत से राजस्थान के किसानों की किस्मत बदल जाएगी।

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फोटो -AI

Rajasthan Farmers : प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों के बीच 'जीवामृत' किसानों के लिए एक वरदान है। यह न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि रासायनिक खादों पर होने वाले भारी खर्च को भी बहुत कम कर देता है। जीवामृत एक ऐसा प्राकृतिक घोल है, जो मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या को तेजी से बढ़ाता है। रासायनिक खादों के निरंतर प्रयोग से मृत हो चुकी मिट्टी को पुनर्जीवित करने के लिए जीवामृत महत्त्वपूर्ण है। इसे बनाने के लिए आपको बाजार जाने की जरूरत नहीं है।

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ये है प्रक्रिया

इसमें डाली जाने वाली एक मुठ्ठी मिट्टी 'कल्चर' का काम करती है। पीपल-वट वृक्ष के नीचे की मिट्टी में पहले से लाभकारी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो पूरे घोल में फैल जाते हैं। पूरे मिश्रण को डंडे से घड़ी की सूई की दिशा में 2-3 मिनट तक घुमाएं। इसके बाद ड्रम को जूट की बोरी से ढक कर छायादार स्थान पर रख दें। इसे धूप से बचाना अनिवार्य है।

अगले 5 से 7 दिनों तक सुबह-शाम इस घोल को डंडे से घुमाते रहे। गर्मियों में यह 4-5 दिन में और सर्दियों में 7-8 दिन में पूरी तरह तैयार हो जाता है। तैयार होने पर इसमें से सौंधी महक आने लगती है।

इस विधि से तैयार करें घोल

किसान भाइ‌यों को 200 लीटर जीवामृत बनाने के लिए इस सामग्री आवश्यकता होगी। 10 किलो देसी गाय का गोबर। 5 से 10 लीटर गोमूत्र। 1 से 2 किलो गुड़ (पुराना हो तो बेहतर)। 1 से 2 किलो बेसन। एक मुट्टी खेत की मेंड़ या वट-पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी। सबसे पहले एक बड़े प्लास्टिक ड्रम में 200 लीटर पानी भरें। इसमें 10 किलो गोबर और गोमूत्र डालकर अच्छी तरह किसी लकड़ी की सहायता से मिला लें।

ध्यान रखें कि ड्रम प्लास्टिक या सीमेंट का हो, लोहे का नहीं। अब इस घोल में गुड़ और बेसन मिलाएं। गुड सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम करता है, जिससे उनकी संख्या करोड़ों में बढ़ जाती है। बेसन प्रोटीन का स्रोत बनकर इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है।

एक एकड़ में इतना

जीवामृत को सिंचाई के पानी के साथ सीधे खेत में दिया जा सकता है। एक एकड़ जमीन के लिए 200 लीटर जीवामृत पर्याप्त होता है। इसे छानकर फसलों पर स्प्रे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिट्टी के लिए लाभकारी

जीवामृत के उपयोग से जमीन में केंचुओं की गतिविधि बढ़ती है। यह मिट्टी के पीएच मान को संतुलित करता है। पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे फसलें हरी-भरी और चमकदार होती है। खाद पर खर्च बहुत कम होता है। अनाज-सब्जियां शुद्ध-स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।

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Published on:
05 Mar 2026 02:07 pm
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