पॉडकास्ट रोचक अंदाज में साहित्य को आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। तुलसीदास ने रामचरितमानस के बाद रामलीला शुरू कर साहित्य को लोक से जोड़ा, आज वही काम पॉडकास्ट कर रहे हैं।
जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में हिंदी साहित्य, पॉडकास्ट और डिजिटल माध्यमों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। सत्र में जयप्रकाश पांडे, अंजुम शर्मा, अनुराग वर्मा और आरती जैन ने अपने विचार साझा किए।
जयप्रकाश पांडे ने कहा कि पुस्तक व्यवसाय आज शिक्षा और ज्ञान के साथ-साथ एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह लेखकों को लोकप्रिय बना रहा है और आलोचकों को पहचान दिला रहा है। उन्होंने कहा कि पॉडकास्ट रोचक अंदाज में साहित्य को आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। तुलसीदास ने रामचरितमानस के बाद रामलीला शुरू कर साहित्य को लोक से जोड़ा, आज वही काम पॉडकास्ट कर रहे हैं। कोविड काल में ऑडियो पॉडकास्ट को विशेष लोकप्रियता मिली, क्योंकि इससे आंखों को आराम मिला और लोग कहानी सुनने लगे।
अंजुम शर्मा ने कहा कि पॉडकास्ट ऐसा माध्यम है, जहां बिना समय सीमा के अपनी बात रखी जा सकती है। उन्होंने 100 से अधिक लेखकों के इंटरव्यू कर साहित्य को रुचिकर बनाने के प्रयोग किए।
अनुराग वर्मा ने कहा कि हर माध्यम की अपनी उपयोगिता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं तक पहुंचने का सबसे सशक्त जरिया है।
आरती जैन ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 से हिंदी कहानियों के पॉडकास्ट शुरू किए, जिन्हें श्रोताओं का भरपूर समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि किताबों का महत्व बना रहेगा और साहित्य अब पॉडकास्ट, सोशल मीडिया, लोक संगीत और फिल्मों के जरिए और व्यापक रूप में सामने आएगा।