जयपुर

Jaipur Accident: मम्मी-पापा को बाय बोलकर निकली लक्षिता.. अब कभी नहीं लौटेगी वापस, मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

जयपुर के जोबनेर में हुए स्कूल बस हादसे ने एक परिवार के सारे सपने उजाड़ दिए। 15 साल की लक्षिता कुमावत शनिवार सुबह रोज की तरह स्कूल के लिए घर से निकली थी, लेकिन सड़क पर हुई एक जोरदार टक्कर ने उसकी जिंदगी छीन ली। जिस बेटी को मां-पिता ने पढ़-लिखकर बड़ा सपना पूरा करते देखने की उम्मीद लगाई थी, उसी की अर्थी को कंधा देना पड़ा।
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Aug 10, 2026
jobner accident
Jaipur: मृतक छात्रा लक्षिता कुमावत और हादसा स्थल की तस्वीर (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकली 15 साल की लक्षिता कुमावत को उसके माता-पिता ने रोज की तरह ही विदा किया था। घर से लक्षिता सभी को बाय बोलकर निकली थी, किसी को क्या पता था कि बेटी के साथ हुई वह विदाई आखिरी होगी। जोबनेर-महला मार्ग पर शनिवार सुबह हुए भीषण स्कूल बस हादसे में गंभीर घायल लक्षिता ने करीब 20 घंटे तक जिंदगी से जंग लड़ने के बाद रविवार सुबह जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में दम तोड़ दिया। बेटी की मौत की खबर घर पहुंची तो मां-पिता की दुनिया ही उजड़ गई। शव गांव पहुंचा तो आसलपुर और भूरोदियों की ढाणी में हर आंख नम थी।

लक्षिता कुमावत तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। वह जोबनेर के टैगोर विद्या मंदिर स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। शिक्षकों के मुताबिक पढ़ाई में वह बेहद होनहार थी। पढ़ाई के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी। स्कूल में कई बार पुरस्कार और मेडल जीत चुकी लक्षिता के सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी थी, लेकिन एक सड़क हादसे ने उसके सारे सपने हमेशा के लिए छीन लिए।

जोबनेर सीएचसी में घायल बच्चे। (फोटो-पत्रिका)

लक्षिता के पिता रतनलाल कुमावत मोबाइल कंपनी में मैकेनिक हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। बेटी की मौत के बाद दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता बार-बार यही कहते रहे कि उन्हें नहीं पता था कि स्कूल के लिए घर से निकली बेटी अब कभी वापस नहीं आएगी।

बस पलटी तो मच गई थी चीख-पुकार

शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे जोबनेर-महला मार्ग पर सीमेंट फैक्ट्री के पास टैगोर विद्या मंदिर स्कूल की बस बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। इसी दौरान चित्तौड़गढ़ से खाटूश्यामजी जा रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से बस की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहन पलट गए। बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई।

हादसे में पलटी बस और एसयूवी (फोटो-पत्रिका)

हादसे में 18 बच्चे घायल हुए थे। दो बच्चों के सिर में चोट लगी, तीन के पैर में फ्रैक्चर हुआ, जबकि एक बच्चे के हाथ में चोट आई थी। कुछ बच्चों के सिर से खून निकलने के कारण बस के अंदर भी खून फैल गया था। स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस के साथ मिलकर क्षतिग्रस्त बस में फंसे बच्चों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत वाले 8-9 बच्चों को जयपुर रेफर किया गया था।

लक्षिता के शरीर में कई जगह गंभीर चोटें

हादसे में लक्षिता के हाथ-पैर में फ्रैक्चर हुआ था। कमर में भी गंभीर चोट लगी थी और लगातार रक्तस्राव हो रहा था। डॉक्टरों की टीम उसके ऑपरेशन की तैयारी कर रही थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी हालत बिगड़ गई और रविवार सुबह उसकी सांसें थम गईं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

लक्षिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शव घर पहुंचा तो मां-पिता और भाई-बहनों की चीखें सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं। गमगीन माहौल में लक्षिता का अंतिम संस्कार किया गया।

छात्रा की मौत के बाद धरने पर बैठे ग्रामीण (फोटो-पत्रिका)

जिस सड़क ने दादा को छीना, वहीं अब पोती भी नहीं रही

लक्षिता के परिवार का दर्द इसलिए भी गहरा है क्योंकि करीब दो साल पहले इसी आसलपुर सड़क मार्ग पर हुए एक हादसे में उसके दादा की भी मौत हो गई थी। परिवार अभी उस दर्द से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि उसी मार्ग पर हुए हादसे ने घर की सबसे बड़ी बेटी को भी छीन लिया।

लक्षिता की मौत के बाद सड़क सुरक्षा पर सवाल

लक्षिता की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी फूट पड़ा। लोगों ने निजी स्कूलों की चार बसों को रोककर प्रदर्शन किया और बसों की जांच की। ग्रामीणों का आरोप है कि एक 42 सीटर स्कूल बस में 92 बच्चों को बैठाया गया था। कुछ बसों पर अनिवार्य रूप से लिखा जाने वाला 'बाल वाहिनी' भी नहीं था।

एक तरफ गांव में लक्षिता की मौत का मातम है, दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बसों की सुरक्षा और क्षमता की निगरानी कितनी गंभीरता से हो रही है। लक्षिता अब स्कूल नहीं जाएगी, लेकिन उसकी मौत ने सड़क और स्कूल परिवहन व्यवस्था से जुड़े कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

Updated on:
10 Aug 2026 06:13 pm
Published on:
10 Aug 2026 05:59 pm