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संपादकीय: लापरवाह सोशल मीडिया और चिंताजनक परिणाम

घटना साजिश का हिस्सा है या कुछ और, ये पता लगाना पुलिस का काम है। एक अफवाह ने सिर्फ फगवाड़ा ही नहीं, बल्कि समूचे पंजाब की शांति को भंग करने का काम किया है।
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जयपुर

•

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Opinion Desk

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Sep 29, 2026

protest

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पंजाब के फगवाड़ा में रविवार को हुई हिंसा, पथराव और लूटपाट के बाद बना माहौल लोकतांत्रिक देश के लिए बेहद चिंताजनक है। चिंताजनक इसलिए कि सब एक विश्वविद्यालय परिसर में हुआ और वो भी छात्रों के प्रदर्शन की आड़ में। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के दावों को सच माना जाए तो एक विश्वविद्यालय में छात्र प्रदर्शन के दौरान घुसे बाहरी छात्रों ने, न सिर्फ शिक्षा के मंदिर में उत्पात मचाया बल्कि पुलिस पर भी पथराव किया। छात्राओं के हॉस्टल में घुसने की कोशिश भी की। प्रदर्शन की आड़ में समाजकंटकों ने विश्वविद्यालय परिसर में बने शॉपिंग मॉल में भी खुलकर लूटपाट की। इस घटनाक्रम के बाद बेशक विश्वविद्यालय में दस दिन की छुट्टी कर दी गई हो या सरकार ने सख्त कदम उठाने का ऐलान कर दिया हो लेकिन घटना अनेक सवाल छोड़ गई है।

सबसे बड़ा और अहम सवाल यह कि छात्र प्रदर्शन की पूर्व जानकारी होने के बावजूद क्या प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए थे? दूसरा अहम सवाल है कि विश्वविद्यालयों के हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं ही यदि सुरक्षित नहीं हैं तो सड़कों पर उनकी सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? ये सारा बवाल एक छात्रा के साथ दुष्कर्म और मौत के वायरल मैसेज के बाद हुआ जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि न तो ऐसे किसी अपराध की पुष्टि हुई और न ही कथित पीडि़ता के बारे में कोई जानकारी मिल पाई है। ऐसे में इस घटनाक्रम के पीछे किसी साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि इसे किसी साजिश का हिस्सा माना जाए तो यह भी जांच का विषय है कि इसके तार आखिर कहां तक जुड़े हैं? ये किसी से छिपा नहीं कि आने वाले चार-पांच महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये तार चुनाव से भी जुड़े हो सकते हैं। घटना साजिश का हिस्सा है या कुछ और, ये पता लगाना पुलिस का काम है। एक अफवाह ने सिर्फ फगवाड़ा ही नहीं, बल्कि समूचे पंजाब की शांति को भंग करने का काम किया है। विश्वविद्यालय में दस दिन की छुट्टियां तो हुई ही, अद्र्धवार्षिक परीक्षाएं तक स्थगित करने की नौबत आ गई।

इस प्रकरण में पुलिस प्रशासन तो अपना काम करेगा ही, लेकिन छात्रों एवं अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे तनाव भरे माहौल को शांत बनाने में मददगार बनें। सोशल मीडिया अगर अफवाह फैलाने में सहायक हो रहा है तो उस पर नियंत्रण पाने की पहल भी छात्रों को ही करनी होगी। एक छोटी सी गलतफहमी अगर माहौल को खराब करती है, तो भविष्य में भी सतर्क रहने की जरूरत है। यहां बात सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में पंजाब के साथ चार अन्य राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तरप्रदेश और मणिपुर भी संवेदनशील हैं। पुलिस प्रशासन के साथ आमजन को सतर्क तो रहना ही होगा, साथ ही माहौल खराब करने वाले तत्वों की पहचान करने में भी सहयोग देना होगा।