जयपुर

Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध में राजस्थान की रेलवे बनी थी लाइफलाइन, जानिए कैसे पहुंचते थे मोर्चे तक हथियार

कारगिल युद्ध के दौरान पश्चिमी राजस्थान का रेल नेटवर्क भारतीय सेना की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक लाइफलाइन बना था। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर से विशेष सैन्य ट्रेनें जवानों, टैंकों, तोपों और गोला-बारूद को मोर्चे तक पहुंचाती रहीं। पूरा रेल नेटवर्क हाई अलर्ट पर था।
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Jul 24, 2026
Kargil Vijay Diwas
बाड़मेर जिले में स्थित मुनाबाव रेलवे स्टेशन (पत्रिका फोटो)

Kargil Vijay Diwas: जयपुर: कारगिल युद्ध के दौरान देश की नजरें बर्फ से ढकी चोटियों पर डटी भारतीय सेना पर थीं, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी राजस्थान की रेल पटरियां भी जीत की अहम कड़ी बनी हुई थीं। कारण था कि राजस्थान के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन भारतीय सेना की लॉजिस्टिक लाइफलाइन बन गए थे। यहां से गुजरने वाली हर सैन्य ट्रेन सिर्फ डिब्बों का काफिला नहीं थी। बल्कि जवानों, टैंकों, तोपों, गोला-बारूद, ईंधन और देश की उम्मीदों को मोर्चे तक पहुंचाने का जरिया थी।

दरअसल, साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू होते ही रेलवे ने अपने परिचालन को युद्धकालीन जरूरतों के अनुरूप ढाल दिया। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर स्थित सैन्य ठिकानों से लगातार विशेष सैन्य ट्रेनें जम्मू और पठानकोट की ओर रवाना होती रहीं। रेलवे यार्डों में सामान्य माल की जगह टैंक, तोपें, सैन्य वाहन और गोला-बारूद से भरी सैन्य रेक नजर आने लगीं। स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, गार्ड, कंट्रोलर और ट्रैकमैन सहित हर रेलकर्मी उस दौर में युद्ध का मौन सिपाही बन गया था।

इधर, युद्ध में 17 रेलकर्मियों ने दी थी शहादत

साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान गडरारोड के पास सेना की रसद लेकर जा रही ट्रेन पर पाकिस्तानी सेना ने हमला कर दिया था। युद्ध में रेलवे के 17 रेल कर्मचारियों ने देश सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया।

ये स्टेशन बने थे केंद्र: रेलवे ट्रैक से बंधी थी उम्मीदें

रेलवे स्टेशनअंतरराष्ट्रीय सीमा से दूरी
मुनाबावलगभग 2 किमी
गडरा रोडलगभग 8 किमी
श्रीगंगानगरलगभग 25 किमी
अनूपगढ़लगभग 30 किमी
बाड़मेरलगभग 100 किमी
जैसलमेरलगभग 110 किमी

हाई अलर्ट पर था पूरा रेल नेटवर्क

पश्चिमी सीमा पर बढ़े तनाव के बीच राजस्थान का रेल नेटवर्क भी हाई अलर्ट पर रहा। संवेदनशील रेल पुलों, यार्डों और स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाई गई। जोधपुर-जैसलमेर, जोधपुर-बाड़मेर-मुनाबाव और बीकानेर-सूरतगढ़-अनूपगढ़ जैसे रणनीतिक रेल मार्गों पर सेना की जरूरतों के अनुरूप निर्बाध परिचालन जारी रखा गया। सैन्य ट्रैफिक की लगातार निगरानी की गई।
-अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे

Updated on:
24 Jul 2026 10:51 am
Published on:
24 Jul 2026 10:50 am