
जयपुर: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइंस और सवर्ण समाज की विभिन्न मांगों को लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर में माहौल गरमा गया है। श्री राजपूत करणी सेना के बैनर तले देशनोक (बीकानेर) से शुरू हुई 24 दिवसीय 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' के जयपुर पहुंचने पर जमकर बवाल हुआ। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार को सीधी चेतावनी दी है। मकराना ने मांग की है कि प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी और धक्का-मुक्की करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि दोषी पुलिस अधिकारियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो करणी सेना के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और आंदोलन को पूरे देश में फैलाएंगे।
24 दिनों में करीब 600 किलोमीटर की कठिन नंगे पांव पदयात्रा पूरी कर सोमवार को जब यह न्याय यात्रा झोटवाड़ा पुलिया पार कर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ी, तो पुलिस प्रशासन ने इसे रोकने की कोशिश की। कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा को 200 फीट बाइपास पर ही रोक दिया गया था।
हालांकि, कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए भारी पुलिस जाप्ता तैनात किया गया और बैरिकेडिंग की गई। जब भीड़ आगे बढ़ी तो पुलिस ने वॉटर कैनन का प्रयोग किया, लेकिन भगवा झंडों और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ आगे बढ़ रहे कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़ दिए। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी रही।
महिपाल सिंह मकराना ने UGC के नए प्रस्तावित नियमों को सवर्ण समाज के छात्रों के भविष्य के खिलाफ 'काला कानून' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों से युवाओं को स्कूली शिक्षा के समय से ही अपराधी की श्रेणी में खड़ा करने जैसी स्थिति पैदा की जा रही है, जिसे समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
मकराना ने कहा, युवाओं के भविष्य के लिए उन्हें स्कूली शिक्षा के समय से अपराधी की श्रेणी में नहीं आने दिया जाए। इसके लिए देशनोक से निकाली गई यह पदयात्रा 24 दिन का कठिन सफर तय कर जयपुर पहुंची है। हम शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा जयपुर जिला कलेक्ट्रेट तक निकालना चाहते थे, ताकि राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जा सके। लेकिन प्रशासन टकराव की स्थिति पैदा कर रहा है और यात्रा को रोकने के लिए बसें बंद कराई जा रही हैं। यह युवाओं के भविष्य की आवाज है, प्रशासन हमें टकराव के लिए मजबूर न करे।
राजस्थान के नागौर (मकराना) से आने वाले महिपाल सिंह मकराना ने राज्य सरकार पर सवर्ण समाज की मांगों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीने से समाज एक बच्चे से जुड़े मामले को लेकर लगातार लोकतांत्रिक और गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहा है। लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
उन्होंने आगे कहा, प्रशासन का यह रवैया संविधान द्वारा दिए गए नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। भारत का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। इतने वर्षों में सवर्ण समाज का इतना बड़ा और एकजुट आंदोलन देखने को नहीं मिला है। हमारा उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। लेकिन यदि सवर्ण समाज के युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया तो संगठन चुप नहीं बैठेगा और इस जन आंदोलन को पूरे देश में फैलाया जाएगा।
तमाम बाधाओं और पुलिस बल के बीच करणी सेना के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में UGC के प्रस्तावित नए नियमों को तुरंत वापस लेने और सवर्ण समाज के हितों की रक्षा करने संबंधी मांगें शामिल हैं। फिलहाल, जयपुर में कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात है। महिपाल सिंह मकराना की CM हाउस के घेराव की चेतावनी के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है।