
जयपुर में सोमवार को महिपाल सिंह के नेतृत्व में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सवर्ण न्याय यात्रा निकाली गई। यह यात्रा 24 दिन पहले बीकीनेर के देशनोक से शुरू की गई थी। इस यात्रा में जयपुर के अलावा बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सोमवार को महिपाल सिंह ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर ज्ञापन सौंपकर इस यात्रा को समाप्त किया। वहीं महिपाल सिंह ने अब कलक्ट्रेट सर्किल पर एक नई मांग रखी है।
कलक्ट्रेट सर्किल पर महिपाल सिंह मकराना एक वैन पर चढ़े हुए दिखाई दिए। वह अपने हाथ में संविधान की किताब लेकर खड़े हुए थे। उन्होंने वैन पर चढ़कर पहले नारी एकता के नारे लगाए और उसके बाद नई मांग रखते हुए वॉटर कैनन चलाने वाले और लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों के सस्पेंशन की मांग की है। साथ ही उन्होंने कलक्ट्रेट पर सभी लोगों से बीजेपी को आनें वाले पंचायत निकाय चुनाव में वोट नहीं देने की शपथ भी दिलवाई।
प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले पुलिस ने 200 फीट बाइपास पर बैरिकेड्स लगाकर करणी सेना के कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की। हालांकि, प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे और बैरिकेड्स पार करने का प्रयास करने लगे। इसके बाद हालात बिगड़ते देख पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट सर्किल तक पहुंच गए।
कलेक्ट्रेट सर्किल पर पहुंचने के बाद एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इस दौरान मौके पर काफी देर तक धक्का-मुक्की, नारेबाजी और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। हालांकि, बाद में करणी सेना के प्रतिनिधियों ने जिला कलक्टर और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर अपनी यात्रा का समापन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन नियमों में सभी वर्गों को बराबर प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे कॉलेजों में फैसले एकतरफा हो सकते हैं और सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, उनका कहना है कि अगर कोई गलत या झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इसका नियमों में साफ जिक्र नहीं है। यही वजह है कि कुछ लोग इन नियमों के गलत इस्तेमाल की आशंका भी जता रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि शिकायतों के निपटारे के लिए तय की गई समय-सीमा कॉलेजों पर अतिरिक्त दबाव बना सकती है।