Online land records: नक्शों की वन—टू—वन मैपिंग और री—सर्वे की प्रक्रिया जारी।चकबंदी, वन टू वन मैपिंग तथा सर्वे प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन गांवों के काश्तकारों को नियमानुसार खातेदारी अधिकार प्रदान किया जाना संभव होगा।
Farmers rights: जयपुर। भूमि आवंटन और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर अक्सर किसानों में भ्रम और चिंता बनी रहती है, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की कमी किसी भी काश्तकार के हक में बाधा नहीं बनेगी। विधानसभा में राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने साफ शब्दों में कहा कि मूल आवंटन पत्रावलियों के अभाव में भी किसी किसान को खातेदारी अधिकार, बैंक ऋण, फसल बीमा या सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सूरतगढ़ तहसील के 500 गांव चकों में से 455 गांवों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। शेष 45 गांवों में से 27 गांवों में मौके की स्थिति और रिकॉर्ड में अंतर पाया गया है, इसलिए यहां विस्तृत सर्वे और री-सर्वे कराया जाएगा। सरकार पहले इन गांवों की जमाबंदी को ऑनलाइन करने जा रही है, जिसके बाद वन-टू-वन मैपिंग और डिजिटल नक्शों का काम पूरा होगा।
राजस्व मंत्री ने यह भी बताया कि 17 गांवों में जमाबंदी और नक्शे दोनों उपलब्ध हैं, जहां मैपिंग की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। चकबंदी और सर्वे पूरा होते ही किसानों को नियमानुसार खातेदारी अधिकार दिए जाएंगे।
यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि किसानों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम भी है। डिजिटल रिकॉर्ड से धोखाधड़ी कम होगी, बैंक ऋण और बीमा जैसी सुविधाएं आसानी से मिलेंगी और जमीन से जुड़े विवाद भी घटेंगे। सरकार का संदेश साफ है—किसान का हक सुरक्षित है, और हर खेत का रिकॉर्ड अब ऑनलाइन और भरोसेमंद होगा।
मीणा ने कहा कि चकबंदी, वन टू वन मैपिंग तथा सर्वे प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन गांवों के काश्तकारों को नियमानुसार खातेदारी अधिकार प्रदान किया जाना संभव होगा।